देहरादून , अप्रैल 30 -- उत्तराखंड मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में 17 विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

कैबिनेट ने परिवहन विभाग के अन्तर्गत, उत्तराखण्ड मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 का अनुमोदन किया है। इसमें अब पुलिस विभाग के चालकों के अनुसार, प्रवर्तन चालकों का भी वर्दी का निर्धारण किया गया है। कुम्भ मेला- 2027 को लेकर हरिद्वार में होने वाले स्थाई एवं अस्थाई निर्माण कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए 01 करोड़ तक के कार्यों को मेलाधिकारी द्वारा तथा 05 करोड़ तक कार्यों को आयुक्त गढ़वाल मंडल द्वारा स्वीकृत किए जाने के लिए भी अनुमोदन प्रदान किया गया है। जबकि 05 करोड़ से अधिक के कार्यों में पूर्व की भांति शासन से स्वीकृति प्राप्त की जायेगी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली 2026 में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। जिसके अन्तर्गत सैनिकों से संबंधित बढ़ते मामलों को देखते हुए अब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य के रूप में नामित होंगे। इसके अतिरिक्त विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क सेवा के अन्तर्गत ऐसेड अटैक विक्टिंग को भी शामिल करने पर सहमति दे दी गई है। इसके अलावा, औद्योगिक विकास विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन करते हुए पूर्व में खनिज पर निर्धारित रॉयल्टी की दर 7 रुपए प्रति कुंतल से बढ़ाकर 8 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने का निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट ने पूर्व में पारित आबकारी नीति के तहत निर्धारित 6 प्रतिशत वैट की दरों के अनुरूप वाणिज्य कर विभाग द्वारा अपनी नियमावली में 6 प्रतिशत वैट की दरों के संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही, परिवहन विभाग द्वारा 250 बस क्रय करने के प्रस्ताव अनुमति दे दी गई है। राज्य में नई बसों की अत्यंत आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसके अलावा परिवहन विभाग को पूर्व में शासन द्वारा 100 बस खरीदने की अनुमति दी गई थी। वर्तमान समय में जीएसटी के रेट 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के चलते अब परिवहन विभाग को 100 की जगह 109 बस क्रय करने की अनुमति भी दे दी गई है।

कैबिनेट ने वन विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 के संशोधन को मंजूरी दी है। जिसमें वन दरोगा के पद के लिए शैक्षिक अर्हता को इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक किए जाने तथा वन दरोगा की आयु सीमा को 21 वर्ष 35 वर्ष करने एवं वन आरक्षी की आयु सीमा 18 वर्ष से अधिकतम 25 वर्ष किए जाने की अनुमति दी गई। इस संबंध में कार्मिक विभाग द्वारा पूर्व में पारित वर्दीधारी नियमावली के अनुबन्ध भी लागू रहेंगे।

सूत्रों ने बताया कि अक्तूबर में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 को अधिसूचित किया गया था, इसमें अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता एवं संस्थानों की शैक्षिक उत्कृष्टता को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने एवं अन्य कार्यों की व्यवस्था इस अधिनियम में की गई थी। इस व्यवस्था में कक्षा 01 से कक्षा 12 तक संचालित अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेने का प्रावधान किया गया था।

वर्तमान में राज्य में 452 मदरसे है, जिनमें लगभग 400 से अधिक मदरसो में कक्षा 01 से कक्षा 8 तक की ही पढ़ाई कराई जाती है। इन मदरसों के अनुरोध एवं उनकी सुविधा के लिए कक्षा 01 से 8 तक के संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति/शासन द्वारा निर्धारित सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा। कक्षा 09 से 12 तक के संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। इस व्यवस्था को लागू करने को कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में अध्यादेश लाने का भी अनुमोदन प्रदान किया गया।

कैबिनेट में इस बिंदु पर भी चर्चा हुई कि कार्मिक विभाग के अन्तर्गत विभिन्न विभागों में एकल संवर्ग में एक वर्ष के भीतर प्रतीक्षा सूची प्राप्त हो गई है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए और भविष्य के लिए एक स्पष्ट एसओपी बना ली जाए, ताकि सभी विभागों और आयोगों को इसके संबंध स्पष्टता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका रजनीश कुमार पांडे व अन्य बनाम भारत सरकार में 28 अक्टूबर, 2021 को पारित निर्णय के क्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2022 में माध्यमिक स्तर को विशेष शिक्षा शिक्षकों की तय की गई शैक्षिक अर्हता के अनुसार विशेष शिक्षा शिक्षक के पदों पर भर्ती के लिए उत्तराखंड विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली में शैक्षिक योग्यताएं रखने को अनुमोदन दिया है।

कैबिनेट ने उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को भी मंजूरी दे दी है। जबकि लोक निर्माण विभाग के अन्तर्गत 2023 में 2010 पदों पर जेई की भर्ती में दिव्यांग श्रेणी के 07 पदों पर उस कैटेगरी के लोग नहीं मिल पाने की वजह से सामान्य श्रेणी से की है भर्ती पर भी मंथन किया गया। जिसमें उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार दिव्यांगजनों के पदों को 2023 से ही रिक्त रखना था। क्योंकि यह पद रिक्त नहीं रखे जा सके, जिन्हें 2023 से ही सृजित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा अनुमति दी गई है।

मंत्रिमंडल में पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा और विधिमान्य अधिनियम के संबंध में 16 जनवरी, 2026 को वर्कचार्ज कर्मियों को पेंशन दिये जाने एवं उनकी सेवा की गणना के संबंध में जारी शासनादेश के उपरांत जारी उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को कैबिनेट के संज्ञानार्थ प्रस्तुत किया गया। उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 के अंतर्गत सूचीबद्ध 'डी' श्रेणी के ठेकेदारों को निविदा सीमा को 01 करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ किये जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट की अनुमति दी गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के क्रम में पूर्व में सरकारी कॉलेज के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों है, जहां नियमित प्राचार्य है, ऐसे महाविद्यालयों में भी मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को लागू करने के प्रस्ताव को भी आज कैबिनेट द्वारा अनुमति दे दी गई है। इसके अलावा वन विभाग द्वारा वन क्षेत्रों की सीमा पर प्रस्तावित मौन पालन की नीति को भी कैबिनेट द्वारा स्वीकृति दी गई है।

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