हरिद्वार , जुलाई 13 -- उत्तराखंड में विधि-विवादित किशोरों के पुनर्वास और संरक्षण को नई दिशा देने की पहल के तहत हरिद्वार में राज्य के पहले राजकीय 'प्लेस ऑफ सेफ्टी' किशोर भवन का शिलान्यास किया गया।

सोमवार को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने राजकीय विशेष गृह परिसर में भूमि पूजन कर भवन निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने की। करीब 5.55 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भवन में 50 किशोरों के रहने की क्षमता होगी। वर्तमान में हरिद्वार में विशेष गृह और प्लेस ऑफ सेफ्टी एक ही भवन में संचालित हैं। नए भवन के निर्माण के बाद दोनों संस्थाओं का संचालन अलग-अलग किया जाएगा, जिससे किशोर न्याय अधिनियम-2015 के प्रावधानों के अनुरूप बेहतर व्यवस्था और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

मंत्री आर्या ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विधि-विवादित किशोरों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि नया प्लेस ऑफ सेफ्टी भवन किशोरों के पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

शिलान्यास कार्यक्रम के बाद मंत्री ने राजकीय बाल देखरेख गृह, संप्रेक्षण गृह (किशोर) तथा राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से संवाद कर उनकी शिक्षा, दिनचर्या और अन्य आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को बच्चों के सर्वोत्तम हित में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।

अधिकारियों ने बताया कि संस्थान में किशोरों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद के साथ-साथ कैनवास पेंटिंग, फाइल फोल्डर निर्माण और भीमल पेंटिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यहां जल्द ही पॉटरी यूनिट भी स्थापित की जाएगी।

रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास के क्षेत्र में संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सामाजिक न्याय और बाल कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे विधि-विवादित किशोरों को बेहतर आवास, शिक्षा, परामर्श, कौशल विकास और पुनर्वास की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

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