शिमला , मई 27 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भविष्य में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ सकने की चेतावनी देते हुए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में सतत शहरीकरण और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
मुख्यमंत्री मंगलवार शाम को गेयटी थिएटर में शिमला नगर निगम के पूर्व उप महापौर टिकेंद्र पंवार द्वारा संपादित पुस्तक "सिटी लिमिट्स - द क्राइसिस ऑफ़ अर्बनाइज़ेशन" का विमोचन करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति का ज़िक्र करते हुए कहा कि राज्य ने पिछले तीन वर्षों के दौरान दो बड़ी आपदाएं देखी हैं, जिनसे जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अब बादल फटने की घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, क्योंकि ऐसी घटनाएं अब केवल ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि निचले इलाकों में भी हो रही हैं।
उन्होंने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री के साथ एक बैठक के दौरान मैंने ज़िक्र किया था कि भविष्य में बादल फटने की घटनाएं केवल हिमाचल प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहेंगी। ऐसी घटनाओं के उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बढ़ने की संभावना है।" मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ हवा और पानी का वरदान मिला है और इन संसाधनों का संरक्षण करना हर नागरिक की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शिमला में तेज़ी से बदलाव आया है और जंगल वाले इलाकों की जगह अब इमारतें बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा, "मैंने अपने बचपन से ही शिमला को बदलते देखा है। जिन इलाकों में कभी जंगल हुआ करते थे, अब वहां इमारतें खड़ी हैं। यहां ऊर्ध्वाधर निर्माण की आवश्यकता है।"उन्होंने शिमला में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार शिमला में ओवरहेड तारों को हटाने और शहर की सुंदरता को बढ़ाने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से एक भूमिगत डक्ट प्रणाली का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सब्ज़ी मंडी स्थल पर 600 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक परिसर विकसित किया जा रहा है, जबकि लिफ्ट क्षेत्र के पास एक अंडरपास का प्रस्ताव भी रखा गया है।
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