नैनीताल , मई 14 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को ईंधन बचत के लिए ''नो व्हीकल डे'' मनाया गया। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश समेत सभी न्यायमूर्ति और अधिवक्तागण अपने आवास से अदालत तक पैदल पहुंचे।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ईंधन संरक्षण के लिहाज से आज नो व्हीकल डे का ऐलान किया गया था। इसी को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, न्यायमूर्ति आशीष नैथानी, आलोक महरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह के साथ ही महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने पैदल यात्रा की।
सभी अपने आवास से बिना वाहन का उपयोग किये उच्च न्यायालय पहुंचे और ईंधन बचत का संदेश दिया। इनके न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अधिकांश अधिवक्ता भी पैदल ही उच्च न्यायालय आये। दूरदराज के अधिवक्ताओं ने आनलाइन माध्यम से सुनवाई में शिरकत की।
पूरा उच्च न्यायालय परिसर वाहनों के बिना खाली नजर आया। अधिवक्ताओं की संख्या भी नाममात्र की नजर आयी। सभी ने इस पहल की सराहना की। मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय की ओर से भी ईंधन बचत का संदेश दिया गया।
उन्होंने कहा कि हम सभी को चुनौतीपूर्ण क्षणों में ईंधन की बचत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सांकेतिक संदेश था और जरूरत पड़ी तो आगे भी आवश्यक कदम उठाए जायेंगे। मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) पूर्ण सिंह बिष्ट, वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी पंत, डीएस पाटनी, महेंद्र सिंह पाल के साथ ही हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष डीएस मेहता, पूर्व महासचिव वीरेंद्र रावत ने इस पहल को ईंधन बचत के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया।
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