केंद्रपाड़ा , अक्टूबर 28 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्रपाड़ा जिले के तिघिरि ग्राम पंचायत की सरपंच चमेली ओझा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ शुरू की गयी अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही को अमान्य एवं रद्द घोषित कर दिया।
न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा की पीठ ने तिघिरि ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्यों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को चुनौती देने वाली श्री ओझा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रक्रिया में अनिवार्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।
ग्राम पंचायत के 22 में से 21 सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। यह प्रक्रिया 27 जुलाई को शुरू की गई थी और मतदान के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की गयी थी। कार्यवाही की वैधता को चुनौती देते हुए श्री ओझा ने तर्क दिया था कि ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 की धारा 24(2)(सी) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है। यह प्रावधान विशेष बैठक बुलाने के लिए कम से कम 15 दिनों के स्पष्ट नोटिस के साथ-साथ अधियाचन और प्रस्तावित प्रस्ताव की प्रतियां प्रदान करने को अनिवार्य बनाता है।
श्री ओझा के वकील ने अदालत में कहा कि इन अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया गया था। याचिकाकर्ता को प्रस्ताव की प्रतियां नहीं दी गयी, बल्कि एक नोटिस उनके पिता को दिया गया और दूसरा डाक से भेजा गया। वकील ने तर्क दिया कि आवश्यक दस्तावेज न मिलने से पूरी प्रक्रिया की वैधता प्रभावित होती है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था ।
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