मुंबई , जून 09 -- महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के ऐतिहासिक श्री सिद्धि विनायक गणपति मंदिर का उज्जैन के महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर पुनर्निर्माण किया जाएगा।
पूर्व विधायक और श्री सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने मंगलवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की। इसका मकसद मंदिर परिसर को आधुनिक बनाना और ट्रैफिक जाम व पार्किंग से जुड़ी आ रही समस्याओं को समाधान करना है।
श्री सरवणकर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) इस परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये देगा। उन्होंने कहा कि यह धन सीधे मंदिर ट्रस्ट के खाते में जमा नहीं किया जाएगा बल्कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नगर निकाय ही अलग-अलग विकास कार्यों पर होने वाले खर्च की देखरेख करेगा।
श्री सरवणकर ने कहा, "विकास कार्य चरणों में पूरे किए जाएंगे। पहले चरण में 100 से 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें परिसर को सुंदर बनाने और एक भव्य प्रवेश द्वार बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। श्रद्धालुओं को लंबे समय से हो रही पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान निकालना भी हमारी प्राथमिकता है।"पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि नगर निगम ने लगभग 80 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए हैं और कुछ करार को मंजूरी भी मिल गई है। पूरी पुनर्निर्माण परियोजना को अगले दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री सरवणकर ने परियोजना के वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक विरोधियों के आरोपों का जवाब देते हुए भ्रष्टाचार के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा, "हमने एक भी रुपया नहीं लिया है और न ही कोई कमीशन हड़पा जाएगा। जो लोग जिंदगीभर 'परसेंटेज की राजनीति' में शामिल रहे हैं, उन्हें हम पर ऐसे बेबुनियाद आरोप नहीं लगाने चाहिए।"गौरतलब है कि इस बदलाव से हर साल इस पवित्र सिद्धि विनायक मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं काफी बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे उन्हें अधिक व्यवस्थित और आध्यात्मिक माहौल मिल सकेगा।
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