वाराणसी , अक्टूबर 26 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका आयोजन आईआईटी कानपुर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला की मेजबानी आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड टीचिंग एक्सीलेंस (सर्टेक्स) ने की।

कार्यशाला में आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने उद्घाटन संबोधन दिया। प्रो. चतुर्वेदी ने शिक्षा की पहुंच बढ़ाने, शोध को गति देने तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों को ज्ञान के सह-सृजन में सहभागी बनाने में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, प्रो. पाठक ने विद्यार्थियों के वास्तविक ज्ञान के आकलन में एआई के उपयोग और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा के लिए स्वदेशी एआई उपकरण विकसित करने पर जोर दिया।

कार्यशाला में तीनों संस्थानों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। बीएचयू के विभिन्न विभागों से 25 विद्यार्थी और 15 संकाय सदस्य शामिल हुए। बीएचयू की प्रो. मंजरी गुप्ता, डॉ. सोमू सिंह और डॉ. प्रतीक चौरसिया ने संसाधन विशेषज्ञ के रूप में उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग तथा इसके नैतिक पहलुओं पर विचार साझा किए। आईआईटी कानपुर और सीएसजेएमयू के शिक्षकों ने भी विभिन्न सत्रों का संचालन किया।

कार्यशाला के समन्वय में आईआईटी कानपुर के प्रो. मनोज हरबोला और प्रो. आदित्य जगन्नाथम तथा बीएचयू के डॉ. प्रतीक चौरसिया ने भूमिका निभाई।

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