देहरादून 10 जुलाई (वार्ता) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल (कैबिनेट) बैठक में प्रदेश के समग्र विकास, शिक्षा, पर्यटन, वित्तीय प्रशासन, युवाओं के रोजगार, वन संरक्षण तथा सुशासन को गति देने वाले कुल दस महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री के अपर सचिव और महानिदेशक सूचना एवं लोक संपर्क वंशीधर तिवारी ने संवाददाता सम्मेलन में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अरेबिया मदरसों की अनुदान योजना का बजट मद वित्तीय वर्ष 2027-28 से समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत केवल उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त संस्थान ही संचालित होंगे। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ में सीमान्त प्रौद्योगिकी संस्थान के विस्तार के लिए 14.857 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है। इससे शैक्षणिक भवन, छात्रावास, फैकल्टी आवास, खेल परिसर, ऑडिटोरियम तथा आधुनिक प्रयोगशालाओं सहित विश्वस्तरीय शैक्षणिक अधोसंरचना विकसित की जाएगी।
श्री तिवारी ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उत्तराखण्ड रिवर राफ्टिंग/क्याकिंग संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई है। नई नियमावली में सुरक्षा मानकों को प्रभावी बनाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही, श्रीनगर में अक्षय पात्र फाउंडेशन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन दिए जाने को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा, कैबिनेट ने राज्य भण्डारण निगम के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ देने का फैसला किया है। इससे निगम के नियमित 68 कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वेतनमान का लाभ मिलेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा तथा व्यय निगम अपने संसाधनों से वहन करेगा।
कैबिनेट ने अर्धकुंभ मेला-2027 की पारदर्शी लेखा परीक्षा के लिए दो पदों का सृजन किए जाने को मंजूरी दी है। इसमें एक तकनीकी विशेषज्ञ तथा एक वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी सहित कुल दो पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही उत्तराखण्ड वित्त सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई है। ताकि पदोन्नति संबंधी उत्पन्न विसंगतियों को दूर किया जा सके। इसके अलावा, राज्य में वित्तीय अनुश्रवण एवं लेखा परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वित्त ऑडिट प्रकोष्ठ की संरचना को अद्यतन करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत पदों के उच्चीकरण, भर्ती स्रोत में परिवर्तन तथा दो नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई।
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