चेन्नई , जून 30 -- तमिलनाडु में चेन्नयी स्थित अपोलो प्रोटॉन कैंसर सेंटर (एपीसीसी) ने बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लेनीरी), समन्वय और उन्नत शल्य चिकित्सा का एक उल्लेखनीय उदाहरण पेश करते हुए उच्च रक्तचाप से पीड़ित एक युवती की उच्च जोखिम वाली स्तन कैंसर सर्जरी में सफलता हासिल की है।
अस्पताल की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक गंभीर फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप पेरिऑपरेटिव मेडिसिन में सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है, जो अक्सर एनेस्थीसिया के तहत हृदय संबंधी विफलता की संभावना के कारण ऐच्छिक सर्जरी को हतोत्साहित करता है। सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस से पीड़ित इस मरीज ने पहले कहीं और कीमोथेरेपी शुरू की थी, लेकिन उपचार के पहले चक्र के बाद उसकी जान को खतरा पैदा हो गया था।
एपीसीसी में रेफर किए जाने पर, उनमें पल्मोनरी आर्टेरियल प्रेशर 140 एमएमएचजी (सामान्य वैल्यू: 20 एमएमएचजी से कम) के करीब पाया गया, जिससे उन्हें सर्जरी के दौरान और उसके आस-पास बहुत ज़्यादा जोखिम का सामना करना पड़ सकता था। इसके अलावा, कीमोथेरेपी पूरी होने के 1.5 महीने बाद भी उनके प्लेटलेट काउंट लगातार कम हो रहे थे, जिससे उनके कैंसर के इलाज की प्रक्रिया और मुश्किल हो गयी और उनके ठीक करने वाली सर्जरी (क्यूरेटिव सर्जरी) के लिए अयोग्य होने का बड़ा जोखिम पैदा हो गया।
ब्रेस्ट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मंजुला राव और उनकी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम इलाज के ज़रिए बीमारी को पूरी तरह ठीक करने की रणनीति पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध रही, क्योंकि मरीज़ की उम्र 40 साल से कम थी और उन्हें शुरुआती स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर था, जिसे ठीक किया जा सकता था।
सर्जिकल टीम ने एनेस्थीसिया, रुमेटोलॉजी, हेमेटोलॉजी और कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम बनायी। इस टीम ने मिलकर उनके पल्मोनरी प्रेशर को स्थिर करने, ब्लड काउंट को बेहतर बनाने और उनकी कुल मेडिकल स्थिति को ठीक करने के लिए काम किया। बारीकी से निगरानी और बेहतर मेडिकल मैनेजमेंट के ज़रिए, टीम सुरक्षित रूप से ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी करने में सफल रही। इससे बीमारी को पूरी तरह ठीक करने के मकसद से इलाज संभव हो पाया और उनके ठीक होने की संभावना (प्रोगोनोसिस) में काफ़ी सुधार हुआ।
गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन वाले मरीज़ों में जनरल एनेस्थीसिया से जुड़े ज़्यादा जोखिम को देखते हुए, सर्जिकल टीम ने एक सावधानीपूर्वक योजना बनाई। यह प्रक्रिया बिना बेहोशी की दवा या मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाओं (मसल रिलैक्सेंट) के, हाई थोरेसिक एपिड्यूरल ब्लॉक के तहत की गई, जिससे दिल और फेफड़ों पर कम से कम दबाव पड़ा और सर्जरी सुरक्षित रूप से पूरी हो सकी।
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