नैनीताल , मई 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सितारगंज सहकारी चीनी मिल के कर्मचारियों के बकाया भुगतान और समायोजन से जुड़े मामले में दायर याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार के औद्योगिक सचिव को कर्मचारियों द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर नियमानुसार विचार करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई। याचिका विपिन चंद पांडे समेत 39 अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 2012 से मृतक आश्रित कोटे के तहत सितारगंज चीनी मिल में कार्यरत हैं। वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने सितारगंज सहकारी चीनी मिल को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया, जिसके बाद कर्मचारियों के सामने रोजगार और बकाया भुगतान का संकट खड़ा हो गया।
कर्मचारियों का आरोप था कि मिल को पीपीपी मोड पर दिए जाने के बाद न तो उनके देयकों का भुगतान किया गया और न ही उन्हें किसी अन्य सरकारी इकाई में समायोजित करने का अवसर दिया गया। यह औद्योगिक कानूनों के प्रावधानों के विपरीत है।
याचिका में कर्मचारियों ने न्यायालय से राज्य सरकार को उनके बकाया देयकों का भुगतान करने और उन्हें समायोजन का अधिकार देने के निर्देश दिए जाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि गदरपुर चीनी मिल के बंद होने के समय कर्मचारियों को समायोजन का विकल्प दिया गया था, इसलिए उनके मामले में भी समान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले का निस्तारण करते हुए औद्योगिक सचिव को कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर विचार कर नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
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