श्रीनगर , सितंबर 18 -- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने हजरतबल दरगाह के हटाये गये इमाम डॉ. कमाल-उद-दीन फारूकी की याचिका पर अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
डॉ. फारूकी को 2024 में एक हिंदू व्यक्ति का कथित रूप से जबरन धर्म परिवर्तन कराने की प्रक्रिया में शामिल होने के बाद पद से हटा दिया गया था।
अदालत ने अधिकारियों को डॉ. फारूकी की ओर से जून 2024 में उन्हें पद से हटाये जाने के खिलाफ दी गयी याचिका पर नियमों के अनुसार विचार करने का भी निर्देश दिया।
न्यायालय ने यह निर्देश 15 सितंबर को डॉ. फारूकी की ओर से दायर याचिका पर दिया। याचिका में हजरतबल दरगाह में उनके कर्तव्यों से लगातार दूर रखे जाने को चुनौती दी गय है। याचिका में जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के आठ अप्रैल 2024 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें जांच लंबित रहने तक इमाम-ओ-खतीब के पद से हटा दिया गया था।
याचिका के अनुसार, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एवं प्रोफेसर एमेरिटस फारूकी पांच अप्रैल 2024 को नमाज से कुछ समय पहले हजरतबल में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। इसी दौरान इस्लाम धर्म अपनाने की इच्छा रखने वाले एक व्यक्ति को उनके सामने लाया गया था।
डॉ. फारूकी ने दावा किया है कि उस व्यक्ति से उनका पहले से कोई संबंध नहीं था और न ही वह उसे वहां लेकर आये थे और न ही उन्होंने उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने उस व्यक्ति से सार्वजनिक रूप से पूछा था कि क्या उसका फैसला स्वेच्छा से लिया गया है और इसमें किसी तरह का बल, धमकी, दबाव, जोर-जबरदस्ती या किसी प्रकार का प्रलोभन नहीं है। इसके बाद उस व्यक्ति ने अपनी इच्छा की पुष्टि की और कलिमा-ए-शहादत पढ़ी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता डॉ. दरख्शां अंदराबी की अध्यक्षता वाले वक्फ बोर्ड ने इसके बाद आठ अप्रैल को फारूकी को उनके कर्तव्यों से हटा दिया और मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की। समिति को सात दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
डॉ. फारूकी ने इस कार्रवाई को चुनौती दी है। उनका कहना है कि प्रस्तावित जांच पूरी होने से पहले ही आदेश में इस घटना को 'जबरन धर्म परिवर्तन' बताया गया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि जांच रिपोर्ट या कोई अंतिम निष्कर्ष उन्हें नहीं बताया गया है और दरगाह से उन्हें दूर रखने की कार्रवाई अनिश्चित समय तक जारी है। उन्होंने गत आठ अप्रैल के आदेश को रद्द करने, उन्हें इमाम-ओ-खतीब के पद पर वापस नियुक्त करने, जांच रिपोर्ट और उससे संबंधित कार्यवाही की जानकारी देने तथा इसके परिणामस्वरूप मिलने वाले अन्य लाभ प्रदान करने की मांग की है।
वैकल्पिक रूप से, उन्होंने मांग की है कि उन्हें संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने और अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद मामले पर स्वतंत्र रूप से और निर्धारित समय सीमा में दोबारा विचार किया जाये। इस मामले में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
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