भिवानी , अगस्त 02 -- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा में पुलिस शिकायतों पर कार्रवाई में कथित लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए भिवानी के पुलिस अधीक्षक को याचिकाकर्ताओं की शिकायतों की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जांच कराने और दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत ने शोकिन खान और उनके भाई साहिल खान द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए पारित किया। मामला थाना लोहारू में दर्ज एक एफआईआर की जांच से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जांच के दौरान उनके साथ उत्पीड़न, अनुचित दबाव और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की गई। इस संबंध में उन्होंने 14 और 17 जून को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शिकायतें और प्रतिवेदन सौंपे थे, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अरुण स्वामी ने अदालत को बताया कि शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं और उन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने न्यायालय से पुलिस अधीक्षक भिवानी को शिकायतों पर पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की।
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक भिवानी को निर्देश दिया कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाए और दो सप्ताह के भीतर शिकायतों का निस्तारण कर कानून के अनुसार उचित आदेश जारी किया जाए।
अधिवक्ता अरुण स्वामी ने कहा कि न्यायालय का यह आदेश संबंधित अधिकारियों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है। यदि निर्धारित 14 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो याचिकाकर्ता न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
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