नैनीताल , जून 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजाजी टाइगर रिजर्व में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को सोमवार को बड़ी राहत देते हुए उनके प्रोत्साहन भत्ते (इंसेंटिव अलाउंस) की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कर्मचारियों को दो सप्ताह के भीतर राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक के समक्ष नया प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि वे वर्ष 2014 से विभिन्न माध्यमों से सेवाएं दे रहे हैं और बाद में पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के माध्यम से कार्यरत हुए। उनका कहना था कि तीन फरवरी 2026 और 20 फरवरी 2026 के शासनादेशों के तहत दिए जा रहे लाभ केवल उपनल कार्मिकों तक सीमित कर दिए गए हैं, जबकि समान कार्य करने वाले अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
याचिका में समान कार्य के लिए समान वेतन, नियमितीकरण पर विचार, प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना तथा वेतन में कटौती और दंडात्मक तबादलों पर रोक लगाने की भी मांग की गई थी। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर दिए गए प्रोत्साहन भत्ते की अब विभाग द्वारा वसूली की जा रही है।
सुनवाई के बाद अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया, बल्कि कर्मचारियों को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि प्रत्यावेदन पर 10 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।
साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तीन माह तक अथवा प्रत्यावेदन पर निर्णय होने तक, जो भी पहले हो, कर्मचारियों से प्रोत्साहन भत्ते की कोई वसूली नहीं की जाएगी।
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