नैनीताल , जून 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऊधम सिंह नगर जिले की जसपुर तहसील के शिपका, मिलख शिपका और मनोरथपुर थर्ड गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वन विभाग से चार सप्ताह के अंदर प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में मनोरथपुर-तृतीय निवासी मुख्त्यार सिंह एवं अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सिंचाई विभाग की ओर से कहा गया कि खंडपीठ के पूर्व आदेशों के अनुपालन में 363 एकड़ भूमि को डी-नोटिफाई कर सुझाव आमंत्रित करने के लिए परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। हालांकि संबंधित भूमि को वन विभाग की ओर से अभी तक डी-नोटिफाई नहीं किया गया है और न ही पोर्टल पर अपलोड किया गया है।

इस पर वन विभाग की ओर से आवश्यक कार्रवाई के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया। न्यायालय ने समय देते हुए विभाग को अगली सुनवाई पर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले न्यायालय ने मामले में सिंचाई विभाग और वन विभाग के नोडल अधिकारियों को नियुक्त कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। बुधवार को सिंचाई विभाग ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी, जबकि वन विभाग रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाया।

यहां बता दें कि दायर याचिका में कहा गया कि सत्तर के दशक के पूर्वार्द्ध में तत्कालीन सरकार ने जसपुर में तुमड़िया बांध बनाने का निर्णय लिया। बांध निर्माण के लिये जसपुर तहसील के तीन गांवों सिबिका, मिलक सिबिका और मनोरथपुर-तृतीय गांवों की 350.65 एकड़ भूमि को अधिग्रहित कर लिया गया। इन गांवों के ग्रामीणों को यहां से हटाकर पास के ही वन भूमि में बसा दिया गया लेकिन आज तक उन्हें राजस्व गांव का दर्जा नहीं दिया गया है।

केन्द्र सरकार की ओर से वर्ष 2008 में इन गांवों को राजस्व गांव घोषित करने पर अपनी सैद्धांतिक सहमति भी दे दी गयी लेकिन प्रदेश सरकार की नाकामी के चलते वर्ष 2018 में इसे वापस ले लिया। अब इन गांवों के लोग अपने हक हुकुक के लिये तरस रहे हैं।

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