कोच्चि , जून 24 -- केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को तिरुवनंतपुरम निगम के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 20 पार्षदों की ली गयी शपथ को अमान्य घोषित कर दिया है। न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि वे केरल नगरपालिका अधिनियम के तहत निर्धारित शपथ का पालन करने में विफल रहे थे।
इसके साथ ही न्यायालय ने सभी 20 पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर निर्धारित तरीके से दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया है।
यह फैसला विपक्ष के पार्षद एस पी दीपक की एक याचिका पर आया है, जिन्होंने 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद आयोजित शपथ ग्रहण समारोह की वैधता को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि पार्षदों ने वैधानिक प्रारूप के अनुसार शपथ नहीं ली थी। इसलिए वे कानूनी रूप से निर्वाचित सदस्यों के रूप में बने नहीं रह सकते हैं।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भाजपा पार्षदों ने कानूनन अनिवार्य 'ईश्वर के नाम पर' शपथ लेने या 'सत्यनिष्ठा से घोषणा' करने के बजाय शपथ लेते समय विभिन्न देवी-देवताओं, भारत माता और शहीदों के नामों का आह्वान किया था।
उच्च न्यायालय ने माना कि शपथ के शब्द कानूनन निर्धारित हैं और व्यक्तिगत प्राथमिकता के अनुसार इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि विशिष्ट देवी-देवताओं या अन्य संस्थाओं का आह्वान कानूनी आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। इसलिए पार्षदों को दिलायी गयी शपथ अमान्य है।
पार्षदों को अयोग्य घोषित करने के बजाय हालांकि अदालत ने उन्हें केरल नगरपालिका अधिनियम के तहत निर्धारित प्रारूप में नये सिरे से शपथ लेने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, जिससे उनकी सदस्यता नियमित हो जायेगी।
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