जयपुर , मार्च 28 -- राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर ने पुलिस व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए व्यापक सुधार के निर्देश दिये हैं।
न्यायालय ने 11 वर्ष तक लंबित एक आपराधिक मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर गंभीर नाराजगी भी जतायी।
यह मामला वर्ष 2014 से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश के आरोप थे। शिकायतकर्ता द्वारा पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। न्यायालय ने इसे न्याय प्रक्रिया में बड़ी चूक बताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस पर कानून-व्यवस्था और जांच दोनों जिम्मेदारियां होने के कारण मामलों की जांच प्रभावित हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने राज्य सरकार को पुलिस कार्यों को दो अलग-अलग शाखाओं जांच और कानून-व्यवस्था में विभाजित करने की नीति लागू करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने संबंधित जांच अधिकारी को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल करने के आदेश दिये हैं। साथ ही मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच में देरी न्याय में देरी के समान है और ऐसी लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
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