नैनीताल , अप्रैल 20 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को न्यायिक सेवा के दो उम्मीदवारों को अंतरिम राहत देते हुए उन्हें मंगलवार (21 अप्रैल) को होने वाली मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी।
यह अंतरिम राहत न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने आज दी।
याचिकाकर्ता अंशुका भंडारी और अनुश्री खत्री ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेएस) द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन के बाद मुख्य परीक्षा से बाहर किए जाने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं के वकील अभिजय नेगी ने बताया कि उम्मीदवारों ने 22 जनवरी, 2026 को जारी संशोधित कट-ऑफ सूची को रद्द करने के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी। इस सूची के कारण, पहले परीक्षा पास कर लेने के बावजूद उन्हें भर्ती प्रक्रया से बाहर कर दिया गया था।
रिट याचिका के अनुसार दोनों उम्मीदवारों ने 31 अगस्त, 2025 को हुई प्रारंभिक परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी। नवंबर में शुरुआती नतीजे प्रकाशित होने के बाद, वे उन 83 उम्मीदवारों में शामिल थीं, जिन्हें मुख्य परीक्षा में बैठने के लिए परीक्षा शुल्क जमा करने को कहा गया था।
हालाँकि, उत्तराखंड न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीजन) की भर्ती प्रक्रिया में तब एक कानूनी अड़चन आ गई, जब कुछ उम्मीदवारों ने अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि उसमें कई सवालों के जवाब गलत हैं।
दिसंबर 2025 में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने यूकेपीएससी को निर्देश दिया कि वह एक सवाल को हटाकर और दो अन्य सवालों के जवाबों को सुधारकर नतीजों की फिर से गणना करे। इस संशोधन के बाद, एक नई मेरिट सूची जारी की गई, जिसमें याचिकाकर्ता संशोधित कट-ऑफ अंकों से बहुत कम अंतर से पीछे रह गईं।
श्री नेगी ने दलील दी कि जिन उम्मीदवारों को पहले ही सफल घोषित किया जा चुका था, उनकी स्थिति में बदलाव करना उच्चतम न्यायालय के स्थापित फैसलों के विपरीत है। उन्होंने विशेष रूप से 'रण विजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' और 'हरि किशन बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय' के फैसलों का हवाला दिया।
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