नैनीताल , अप्रैल 22 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून-मसूरी की संवेदनशील तलहटी (फुटहिल) क्षेत्र में हो रहे कथित अवैध निर्माणों पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में बुधवार को देहरादून निवासी रीनू पाल की ओर से इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

इस मामले में आज याचिकाकर्ता की ओर से एक प्रार्थना पत्र (अर्जेंसी एप्लीकेशन) पत्र देकर आरोप लगाया गया है कि देहरादून और मसूरी के बीच स्थित तलहटी क्षेत्र, जो पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, वहां बिना रोक-टोक अवैध निर्माण किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की नाजुक इकोलॉजी पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने पांच फरवरी 2019 के शासनादेश के तहत इस क्षेत्र के नौ स्थानों को 'इकोलॉजिकली सेंसिटिव' घोषित किया था। इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह का समय निर्धारित किया है।

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