मुंबई , अगस्त 06 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई के घाटकोपर सड़क दुर्घटना में आरोपी 17 वर्षीय एक लड़के की जमानत रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी जिससे उसे परीक्षा में बैठने के लिए अनुमति मिल गयी।

लड़के के परिवार ने सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। बुधवार को उसके वकील ने तत्काल राहत की मांग करते हुए कहा कि नाबालिग को छह से आठ अगस्त तक परीक्षाओं में शामिल होना है। अर्जी पर विचार करने के बाद उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी और नाबालिग को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी। मामले की सुनवाई 17 अगस्त तक के लिए टाल दी गयी।

यह मामला पांच फरवरी की रात का है जब घाटकोपर में एक तेज़ रफ़्तार एसयूवी ने, जिसे कथित तौर पर एक नाबालिग चला रहा था, एक स्कूटर को टक्कर मार दी जिससे ध्रुमिल पटेल और उनकी पत्नी मेनल गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के नौ दिन बाद ध्रुमिल की चोटों के कारण मौत हो गई जबकि मेनल कई दिनों तक गंभीर हालत में रहीं। बाल न्याय बोर्ड ने सात मार्च को नाबालिग को ज़मानत दे दी थी। बाद में मेनल ने अपने वकील के माध्यम से सत्र न्यायालय में ज़मानत के आदेश को चुनौती दी और ज़मानत रद्द करने की मांग की। इसके बाद सत्र न्यायालय ने नाबालिग की ज़मानत रद्द कर दी और उसे सुधार गृह भेजने का आदेश दिया।

सत्र न्यायालय ने कहा कि 'कानून के दायरे में आने वाला बच्चा' एक अमीर परिवार से है और कथित रूप से "बिगड़ैल बच्चों" की संगत में है; वह दो-पहिया और चार-पहिया वाहनों पर स्टंट करता था जिससे दूसरों की जान को खतरा हो सकता था। नाबालिग को सुधार गृह में रखना उसके लिए फायदेमंद होगा और समाज के व्यापक हित में भी होगा।

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