नैनीताल , अगस्त 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले के कांडा तहसील के खड़िया खनन प्रभावित गांवों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा पेश करने के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी है। इस मामले में अब दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। उच्च न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है।
खंडपीठ की ओर से गत 17 जून को एक आदेश जारी कर ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के संबंध में सरकार को अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे लेकिन सरकार रिपोर्ट पेश करने में नाकाम रही।
सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए अतिरिक्त खंडपीठ से समय मांगा गया। खंडपीठ ने दो सप्ताह की मोहलत देते हुए इस संबंध में उठाए गए कदमों को लेकर जवाब देने को कहा है।
गौरतलब है कि कांडा तहसील में अनियंत्रित खड़िया खनन के चलते ग्रामीणों के आवासीय भवनों, कृषि भूमि और खेतों में दरारें पड़ने तथा जल स्रोतों के सूखने की शिकायतें सामने आई थीं। ग्रामीणों की ओर से खनन के चलते प्राकृतिक आपदा के खतरे की आशंका भी जताई गई थी।
अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायमित्र अधिवक्ताओं की एक टीम को हालात का जायजा लेने के लिए कांडा तहसील भेजा था। टीम की ओर से उच्च न्यायालय को रिपोर्ट सौंपी गई। इस मामले में गत 12 अगस्त को सुनवाई हुई लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हो पायी है।
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