जयपुर , जुलाई 20 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने टोंक में राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की आवासीय योजना के लिए किये गए भूमि अधिग्रहण मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक मार्च 2017 के भूमि अवार्ड को निरस्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि अवार्ड, उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 24(1)(ए) एवं धारा 25 के प्रावधानों के विपरीत पारित किया गया, इसलिए इसे कानून के अनुसार नहीं माना जा सकता।
अदालत ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं और पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकार करते हुए न केवल एक मार्च 2017 के अवार्ड को रद्द किया, बल्कि उस अवार्ड के आधार पर की गई संपूर्ण भूमि अधिग्रहण कार्रवाई भी निरस्त कर दी।
मामले में प्रमुख याचिकाकर्ताओं में फैयाज खान, लियाकत अली खान, फिरोज खान, मोहम्मद शफीक, सुरजमल साहू, प्रकाश साहू सहित अन्य खातेदार शामिल थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एक जनवरी 2014 को नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने तक अवार्ड पारित नहीं हुआ था, जबकि अवार्ड एक मार्च 2017 को जारी किया गया, जो कानून में निर्धारित समय-सीमा से काफी बाद का था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक बंसल सहित पल्लव चौधरी, आयुष बंसल, समीर शर्मा, आदित्य जोशी, पुनीत गर्ग, मीरा बाई, विकास काबरा और प्रवीण कुमार जैन ने पैरवी की। वहीं राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों की ओर से अजय शुक्ला, अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता वी.डी. गठाला सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित