कोलकाता , अगस्त 24 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय की दायर याचिका पर सुनवाई 10 सितंबर तक के लिए टाल दी और इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य की पुलिस को उनके खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों का ब्योरा सौंपने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति सौगात भट्टाचार्य की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता को लिखित रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें श्री रॉय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों की कुल संख्या स्पष्ट की गयी हो।

न्यायालय ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जायेगी और यदि इस बीच पुलिस कोई कार्रवाई करती है, तो श्री रॉय न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

श्री रॉय ने भर्ती और भूमि भ्रष्टाचार से संबंधित प्राथमिकियों को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायालय ने इससे पहले उन्हें भर्ती मामले में राहत दी थी, लेकिन जमीन से जुड़े मामले में संरक्षण की उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद श्री रॉय ने उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिल गयी। इस मामले पर उच्चतम न्यायालय 31 अगस्त को सुनवाई कर सकता है।

श्री रॉय के अधिवक्ता विकास पाहवा ने सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कई और प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग हर दिन प्राथमिकियां दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि श्री रॉय जांच में सहयोग कर रहे हैं और जांच एजेंसी के समक्ष आठ बार पेश हो चुके हैं। अधिवक्ता के अनुसार, श्री रॉय के खिलाफ पहली प्राथमिकी पांच जून को और दूसरी 16 जून को दर्ज की गयी थी, जिसके बाद कई अन्य मामले दर्ज किये गये।

इन दलीलों के बाद न्यायालय ने सभी मामलों का ब्योरा मांगा।

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि जब तक उच्चतम न्यायालय इस मामले पर विचार नहीं कर लेता, तब तक इस सुनवाई को टाल दिया जाये। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री बनर्जी के सहयोगी के जरिये एक बैंक खाते में 20 करोड़ रुपये जमा किये गये थे और श्री रॉय के खिलाफ कई आरोप हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि उच्च न्यायालय 31 अगस्त को उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही इस मामले पर सुनवाई करे।

इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई 10 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी और संकेत दिया कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले पर विचार करने के बाद ही आगे का निर्णय लेगा।

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