जयपुर , अगस्त 27 -- राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर और जोधपुर स्थित तीनों बार संघों के पदाधिकारियों ने हाल में मीडिया के माध्यम से सामने आए न्यायपालिका से जुड़े घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
पदाधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई आपात बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई।
मीडिया में प्रकाशित समाचारों के मुताबिक उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को तीन पत्र भेजे हैं, जिनमें राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न आरोप लगाए जाने और उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा संस्थागत स्तर पर जांच कराए जाने की बात भी सामने आई है।
बार संघों ने कहा कि मामला न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा और स्वतंत्रता से जुड़ा होने के कारण अधिवक्ता समुदाय इसे गंभीर चिंता के साथ देख रहा है। उन्होंने न्यायपालिका के किसी भी पद, कार्यालय अथवा संस्थागत व्यवस्था के कथित दुरुपयोग की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष अथवा अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। दो दिन बाद तीनों बार संघों के सभी पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद आगे की रणनीति और निर्णय तय किया जाएगा।
तीनों बार संघों ने न्यायपालिका से अपेक्षा जताई कि पूरे मामले में संस्थागत गरिमा, स्वतंत्रता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि आमजन का न्यायपालिका पर विश्वास कायम रहे और न्याय व्यवस्था में अधिवक्ता समुदाय सहित समाज के सभी वर्गों का भरोसा और मजबूत हो।
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