नयी दिल्ली , अप्रैल 24 -- उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उन व्यक्तियों की रिट याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिन्हें मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था, जबकि वे वर्तमान विधानसभा चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उन अपीलीय न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के पास जाने का निर्देश दिया, जिन्हें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की चुनौतियों की सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के आदेश पर गठित किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने अदालत को बताया कि कई अधिकारियों के नाम बिना किसी कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।
न्यायमूर्ति बागची ने स्वीकार किया कि जिन लोगों की अपील अभी लंबित है, वे शायद पश्चिम बंगाल के मौजूदा विधानसभा चुनावों में मतदान नहीं कर पाएंगे, लेकिन वे अपनी अपील जारी रख सकते हैं ताकि भविष्य के लिए मतदाता सूची में उनका नाम बहाल किया जा सके। न्यायालय ने बताया कि वर्तमान में लगभग 19 अपीलीय न्यायाधिकरण कार्य कर रहे हैं और वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित