नयी दिल्ली , जनवरी 27 -- उच्चतम न्यायालय ने जियो स्टार की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग(सीसीआई) को जियोस्टार प्राईवेट लिमिटेड के केरल टेलीविजन प्रसारक क्षेत्र में प्रभुत्व के दुरूपयोग की जांच के आदेश दिये गये थे।

केरल उच्च न्यायालय ने सीसीआई को आदेश दिया था कि केरल टीवी प्रसारण बाज़ार में 'वर्चस्व का दुरुपयोग' करने के मामले में जियोस्टार की गतिविधियों की जांच करे। जियोस्टार प्राइवेट लिमिटेड ने उच्च न्यायालय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रूख किया था।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मंगलवार को इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा क्योंकि यह मामला जांच के शुरुआती चरण में है।

उल्लेखनीय है कि एशियानेट डिजिटल नेटवर्क लिमिटेड (एडीएनपीएल) ने जियोस्टार के खिलाफ शिकायत करते हुए कहा था कि यह कंपनी केरल टीवी प्रसारण बाज़ार में अपनी मज़बूत स्थिति का दुरुपयोग कर रही थी, जो प्रतियोगिता अधिनियम 2002 का उल्लंघन था।

डिजिटल केबल टीवी सेवा कंपनी एशियानेट ने आरोप लगाया था कि जियोस्टार ने केरल कम्युनिकेटर्स केबल लिमिटेड को भेदभावपूर्ण छूट दी थी और कंपनी को विशेषाधिकार दिये, जिससे बाजार में प्रतियोगिता प्रभावित हुई। जियोस्टार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी भारतीय दूरसंचार प्राधिकरण प्राधिकरण (ट्राई) अधिनियम 1997 के दिये हुए नियामक ढांचे के तहत काम करती है। प्रसारण क्षेत्र में कीमतें और छूट इसी से निर्धारित होते हैं।

श्री रोहतगी ने दलील दी कि ट्राई के क्षेत्र के अधीन आने वाले मामलों की जांच प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत नहीं की जा सकती। श्री रोहतगी ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के एक पूर्व फैसले का भी हवाला दिया, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस स्तर पर कोई भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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