नयी दिल्ली , जुलाई 29 -- उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया कि केंद्र सरकार केवल पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा तीन के तहत वैध कानूनी अधिसूचना जारी करने के बाद ही कार्योत्तर पर्यावरण मंज़ूरी की अनुमति दे सकती है। वह केवल एक साधारण प्रशासनिक कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से ऐसी स्वीकृतियां नहीं दे सकती है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने तदनुसार केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के कार्यालय ज्ञापन को निरस्त कर दिया जिसने उन परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करने के लिए एक तंत्र स्थापित किया था, जिन्होंने पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही अपना काम शुरू कर दिया था।

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