नई दिल्ली , मार्च 13 -- उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सभी संस्थानों में महिलाओं के लिए अनिवार्य सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस तरह की कानूनी अनिवार्यता का महिलाओं को रोजगार मिलने की संभावनाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
न्यायालय ने उल्लेख किया कि हालांकि यह मुद्दा महिलाओं के कल्याण से संबंधित है, लेकिन कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य बनाने से नियोक्ता महिलाओं को काम पर रखने या उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने में संकोच कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र सरकार को याचिकाकर्ता की याचिका पर विचार करने और यह देखने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया कि क्या संबंधित हितधारकों के परामर्श से मासिक धर्म अवकाश पर कोई नीतिगत ढांचा तैयार किया जा सकता है।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की स्थिति पर सवाल उठाया और नोट किया कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे से प्रभावित नहीं था। न्यायालय ने यह भी देखा कि किसी भी महिला ने ऐसी राहत के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया।
पीठ ने आगे बताया कि याचिकाकर्ता ने पहले भी इसी मुद्दे पर समान याचिकाएं दायर की थीं। साल 2023 और 2024 में दायर की गई पिछली याचिकाओं के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार को पहले ही प्रतिवेदन की जांच करने और नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए जा चुके थे।
न्यायाधीशों ने संकेत दिया कि हालांकि कुछ संगठनों और कुछ राज्यों ने स्वेच्छा से मासिक धर्म अवकाश नीतियां शुरू की हैं, लेकिन कानून के माध्यम से ऐसी आवश्यकता को थोपने से प्रतिस्पर्धी नौकरी के बाजार में महिला कर्मचारी कम अनुकूल दिखाई दे सकती हैं, जिससे उल्टा प्रभाव पड़ सकता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि संविधान के तहत महिलाओं के लिए सकारात्मक कार्रवाई को मान्यता दी गई है, लेकिन रोजगार के अवसरों और करियर की प्रगति पर नीतिगत उपायों के दीर्घकालिक प्रभाव पर भी विचार किया जाना चाहिये।
कानून से समर्थित ऐसी नीति के संभावित प्रतिकूल प्रभाव की आशंका को देखते हुए, पीठ ने रिट याचिका का निपटारा कर दिया। न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार के सक्षम अधिकारी को याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करना चाहिए और हितधारकों से परामर्श करने के बाद इस मुद्दे पर उचित निर्णय लेना चाहिये।
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