बेंगलुरु , जुलाई 17 -- उच्चतम न्यायालय के एक बड़े फैसले से कर्नाटक विधान परिषद का राजनीतिक समीकरण बदल गया है तथा 75 सदस्यीय सदन में सत्तारूढ़ कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत होने के साथ ही उच्च सदन में कांग्रेस के सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर अब 40 हो गयी है।
न्यायालय ने चिक्कमगलुरु स्थानीय प्राधिकरण चुनाव क्षेत्र से मतों की दोबारा गिनती के बाद कांग्रेस उम्मीदवार एवी गायत्री शांतगौड़ा को निर्वाचित घोषित कर दिया है। इसके साथ ही कर्नाटक विधान परिषद के उपसभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता एमके प्राणेश को बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि अदालत ने उनका निर्वाचन रद्द कर दिया है।
इस ऐतिहासिक फैसले से जहां वरिष्ठ भाजपा नेता को विधान परिषद से बाहर होना पड़ा है, वहीं कांग्रेस ने उच्च सदन में अपना संख्याबल काफी मजबूत कर लिया है।
यह पूरा चुनावी विवाद 10 दिसंबर 2021 को हुए चुनाव से जुड़ा है, जिसमें श्री प्राणेश को मूल रूप से मात्र छह वोटों के बेहद मामूली अंतर से विजयी घोषित किया गया था, जिसके बाद उन्होंने विधान परिषद के उपसभापति का पदभार संभाला था। कांग्रेस उम्मीदवार गायत्री शांतगौड़ा ने हालांकि इस परिणाम को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और मतगणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाये थे। उनकी दलील थी कि गिनती के दौरान वैध मतपत्रों को गलत तरीके से खारिज किया गया, अमान्य मतों को स्वीकार किया गया, चुनाव नियमों का उल्लंघन हुआ और टाउन पंचायतों के उन मनोनीत सदस्यों को भी मतदान की अनुमति दी गयी, जो इसके पात्र नहीं थे।
उच्च न्यायालय ने 29 जनवरी 2025 को इस मामले में मतों की दोबारा गिनती कराने का निर्देश जारी किया था, जिसे श्री प्राणेश ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के जरिये उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पुनर्मतदान की अनुमति तो दी थी, लेकिन आदेश दिया था कि अंतिम फैसला आने तक इस परिणाम को पूरी तरह सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। अब अदालत ने श्री प्राणेश की याचिका को खारिज करते हुए अंतरिम आदेश के तहत हुई दोबारा गिनती के परिणाम को स्वीकार कर लिया है, जिससे वह सीलबंद परिणाम प्रभावी हो गया और गायत्री के निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया। चुनाव आयोग के आवश्यक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद उनके जल्द ही पदभार संभालने की उम्मीद है।
यह अदालती फैसला कर्नाटक में कांग्रेस के लिए एक और बड़ी न्यायिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले इसी वर्ष मई में भी उच्चतम न्यायालय ने पोस्टल बैलट की दोबारा गिनती के विवाद को सुलझाते हुए शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक टीडी राजेगौड़ा के निर्वाचन को वैध ठहराया था।
इस ताजा फैसले ने न केवल उच्च सदन से भाजपा के उपसभापति को हटा दिया है, बल्कि विधान परिषद में कांग्रेस के संख्याबल को और अधिक मजबूत कर उसे स्पष्ट बढ़त दिला दी है।
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