नयी दिल्ली , अक्टूबर 25 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ई-संजीवनी योजना की सराहना करते हुए कहा है कि इस डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से देश में अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं और इसने दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं पहुंचाकर स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाया है।

श्री मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में ई-संजीवनी योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से देश में अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा तकनीक की ताकत, डॉक्टरों के सेवाभाव और देशवासियों के विश्वास का बेहतरीन उदाहरण है। ई-संजीवनी ने दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं पहुंचाकर स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाया है।

उन्होंने कहा कि भारतीयों की एक बड़ी विशेषता नयी तकनीक को तेजी से अपनाना और उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। ई-संजीवनी योजना इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे लोगों के जीवन को आसान बनाने में तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल का पता चलता है। उन्होंने कहा कि इस सेवा का विशाल नेटवर्क अब देश के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच चुका है और जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श मिल रहा है।

उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के बच्चे ओहो-ताहाने का उदाहरण देते हुए बताया कि उसे तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। जांच में बच्चे को निमोनिया होने का पता चला और विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में उसका इलाज शुरू होने के बाद उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

श्री मोदी ने लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 वर्षीय कुन्ही कोया का भी उल्लेख किया, जिनकी तबीयत अचानक बिगड़ गयी थी। ई-संजीवनी के माध्यम से समुद्र के दूसरी ओर कवरत्ती में मौजूद अनुभवी चिकित्सक से संपर्क किया गया। डॉक्टर ने स्थानीय चिकित्सा दल को आवश्यक मार्गदर्शन दिया, जिससे कुन्ही कोया को राहत मिली। इसी तरह लद्दाख के जांस्कर में गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का सामना कर रहीं कुंजांग डोलमा को विशेषज्ञ चिकित्सक की तत्काल सहायता मिली। नागालैंड के पेरेन में 12 वर्षीय मुशेम को कान में संक्रमण और बुखार होने पर भी इस सेवा के जरिए विशेषज्ञ परामर्श और उचित दवाओं के सुझाव मिले।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले छोटी-मोटी स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर से परामर्श लेने में भी लोगों को काफी समय और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब देशभर में लगभग एक लाख 90 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र गांवों में पंचायत स्तर पर वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। सबसे सुखद बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अब नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इस बदलाव में ई-संजीवनी की महत्वपूर्ण भूमिका है और डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास लगातार मजबूत हो रहा है।

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