रायपुर , अगस्त 31 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराने के लिए 'ई-रेत संगवारी' और जनजातीय टिन संग्राहकों को पारदर्शी मूल्य एवं भुगतान सुनिश्चित करने के लिए टीआईएन (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज) पोर्टल का शुभारंभ किया।
नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के सतत और समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही है।
'ई-रेत संगवारी' पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराई जाएगी। रेत की मांग, स्वीकृति और उपलब्धता की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। सरकार के अनुसार इससे हितग्राहियों को रेत के लिए अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलने के साथ आवास निर्माण की लागत कम करने और निर्माण कार्य में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित टीआईएन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय, परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
टीआईएन पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से टिन विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। पोर्टल में डिजिटल पंजीयन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, एसएमएस अलर्ट, स्वचालित भुगतान गणना, ऑडिट ट्रेल और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
सीएमडीसी वर्तमान में बस्तर संभाग में छह टिन क्रय केंद्र संचालित कर रहा है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में तीन नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है।
टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक की प्रक्रिया के लिए सीएमडीसी ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी लागू की है। इसके तहत सैंपल की संख्या 12 से घटाकर छह और प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम किया गया है। परीक्षण परिणाम को लेकर असहमति की स्थिति में पुनः विश्लेषण का प्रावधान भी रखा गया है।
सीएमडीसी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में जनजातीय हितग्राहियों से 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क की खरीदी के एवज में करीब 90.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
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