बैतूल , जुलाई 6 -- मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। सभी शिक्षकों को निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में परिवहन विभाग के इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट दोबारा शुरू किए जा सकते हैं।

रविवार को बैतूल में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से चर्चा में मंत्री ने शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (टीईटी), ई-अटेंडेंस व्यवस्था और परिवहन विभाग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा।

टीईटी के संबंध में उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है और राज्य सरकार न्यायालय के अंतिम निर्णय का पूर्ण पालन करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों और मापदंडों के अनुसार की गई थीं। यदि उच्चतम न्यायालय पात्रता परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देता है तो सरकार उसके अनुरूप कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मुख्य चिंता यह है कि जिन नियमों के आधार पर उनकी नियुक्ति हुई, अब उनके लिए नए मापदंड लागू करने की बात की जा रही है। सरकार इस मामले में न्यायालय के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रही है।

ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर मंत्री ने कहा कि सरकार इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी शिक्षकों को समय पर विद्यालय पहुंचकर मोबाइल या अन्य स्वीकृत माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय में नियमित उपस्थिति और पूरे समय तक दायित्वों का निर्वहन प्रत्येक शिक्षक की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 98 प्रतिशत अतिथि शिक्षक और 90 प्रतिशत नियमित शिक्षक ई-अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। कुछ शिक्षकों की आपत्तियों के कारण पूरी व्यवस्था को बंद नहीं किया जा सकता। हालांकि जिन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या है, वहां व्यावहारिक राहत दी जा रही है। इसके अलावा मातृत्व अवकाश पर रहने वाली महिला अतिथि शिक्षकों तथा अन्य विशेष परिस्थितियों में भी आवश्यक छूट प्रदान की गई है।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश के लगभग एक हजार गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क संबंधी समस्या है। ऐसे क्षेत्रों में कार्यरत सात से आठ प्रतिशत शिक्षकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। सरकार का उद्देश्य तकनीकी बाधाओं को दूर करते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

परिवहन विभाग के इंटीग्रेटेड चेक पोस्टों के संबंध में उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की है। सरकार इस बात का अध्ययन कर रही है कि जिन चेक पोस्टों पर पहले से निवेश किया जा चुका है, वहां परिवहन, खनिज, कृषि और वाणिज्य विभागों के संयुक्त अमले की तैनाती कर डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालन किया जाए। यदि यह व्यवस्था पारदर्शी और प्रभावी सिद्ध होती है तो भविष्य में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित