नयी दिल्ली/इम्फाल (वार्ता) देशभर में आज ईस्टर का त्योहार हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति, एकता एवं करुणा की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर बधाई देते हुए कहा कि यह पवित्र दिन आशा और नवजीवन का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि ईसा मसीह की शिक्षाएं सभी को दयालु बनने और समाज में एकजुटता की भावना को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करें। श्री खरगे ने अपने संदेश में कहा कि ईसा मसीह का पुनरुत्थान इस बात की शाश्वत सीख है कि सत्य हमेशा असत्य पर विजय प्राप्त करता है और आशा निराशा से ऊपर उठती है।

ईस्टर ईसाई धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो ईसा मसीह के पुनरुत्थान (दोबारा जी उठने) की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार निराशा पर विजय और नयी शुरुआत का प्रतीक है। प्रार्थनाएं, चर्च में विशेष सभाएं और दान-पुण्य के कार्य इस उत्सव का मुख्य हिस्सा होते हैं। भारत में केरल, गोवा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी विशेष रौनक देखने को मिलती है, जहां चर्चों को फूलों से सजाया जाता है और प्रार्थना सभा आयोजित की जाती हैं।

मान्यताओं के अनुसार, ईसा मसीह को आज से लगभग दो हजार साल पहले यरूशलम में रोम के शासकों ने सूली पर चढ़ा दिया था। जिस दिन उन्हें सूली दी गयी, उसे 'गुड फ्राइडे' कहा जाता है। सूली पर चढ़ाये जाने के बाद उनके पार्थिव शरीर को एक कब्र में रखा गया था और उसके द्वार पर एक विशाल पत्थर लगा दिया गया था। गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी रविवार को जब अनुयायी वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि पत्थर हटा हुआ था और गुफा खाली थी। मान्यता है कि ईसा मसीह मृत्यु पर विजय प्राप्त कर दोबारा जीवित हो गये थे। इसी दिन को ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। गुड फ्राइडे जहां सत्य के लिए बलिदान का प्रतीक है तो ईस्टर असत्य पर सत्य की जीत का।

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