नयी दिल्ली , मार्च 05 -- अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच भारत ने उन दावों को नकार दिया है जिनमें कहा गया था कि ईरान के खिलाफ हमले में अमेरिका भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रहा है।

यह प्रतिक्रिया एक पूर्व अमेरिकी कर्नल के उस दावे के बाद आयी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी नौसेना मौजूदा संघर्ष में भारतीय बंदरगाहों का सहारा ले रही है।

अमेरिकी चैनल 'वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क' (ओएएनएन) को दिये साक्षात्कार में कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने कहा, "हमारे सभी ठिकाने नष्ट हो गये हैं। हमारे बंदरगाह प्रतिष्ठान नष्ट हो गये हैं। हमें वास्तव में भारत और भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो आदर्श स्थिति से कम है। नौसेना का यही कहना है और मुझे लगता है कि हमारी निराशा के बावजूद ईरान बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। सवाल यह है कि हम इसे कब तक जारी रख सकते हैं?"इस दावे को फर्जी बताते हुए पीआईबी तथ्य जांच ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ": अमेरिका स्थित चैनल 'वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क' पर अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने एक बयान दिया है, जिसमें कहा गया है कि चल रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष में अमेरिका ईरान पर हमला करने के लिए भारतीय नौसेना के ठिकानों का इस्तेमाल कर रहा है। यह दावा फर्जी है।"विदेश मंत्रालय (एमईए) ने भी मैकग्रेगर के दावे को खारिज कर दिया। 'एक्स' पर एक पोस्ट में मंत्रालय ने लिखा, "फेक न्यूज अलर्ट! अमेरिका स्थित चैनल ओएएनएन पर किये गये दावे कि अमेरिकी नौसेना भारतीय बंदरगाहों का उपयोग कर रही है फर्जी और झूठे हैं। हम आपको ऐसे निराधार और मनगढ़ंत बयानों के प्रति आगाह करते हैं।"गौरतलब है कि बुधवार को 100 से अधिक नाविकों को ले जा रहे ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हमला किया था।

भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में आयोजित 'इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026' में अपनी भागीदारी पूरी करने के बाद ईरानी नौसैनिक फ्रिगेट आईआरआईएस डेना ने वापसी के लिए निकला था। इसी बीच हिंद महासागर में उस पर हमला हुआ और बाद में वह श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डूब गया।

रिपोर्टों के अनुसार, इस टॉरपीडो हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गये, जबकि 32 को श्रीलंकाई नौसेना ने बचा लिया।

इस युद्धपोत ने इससे पहले भारत के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक, 'एक्सरसाइज मिलान 2026' में भाग लिया था। इस अभ्यास में 42 जहाजों, 29 विमानों और 74 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था, जो प्रतिभागी नौसेनाओं के बीच व्यापक समुद्री सहयोग को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम का समापन भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर आयोजित औपचारिक समारोह के साथ हुआ था।

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