ब्रुसेल्स , मार्च 27 -- बेल्जियम के यूरोपीय संसद के सदस्य रूडी केनेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले रहे मौजूदा संकट के बीच यूरोपीय संघ (यूई) दोराहे पर खड़ा है और इसको लेकर आम लोगों तथा प्रतिनिधियों के बीच गहरा मतभेद है। श्री केनेस ने रशियन टेलीविजन से कहा कि इस समूह में ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध को लेकर गहरा मतभेद है। जहाँ एक ओर जनता की राय इस युद्ध के सख्त खिलाफ है, वहीं दूसरी ओर ब्रुसेल्स में बैठे गैर-निर्वाचित अधिकारियों ने अमेरिका का समर्थन किया है। उन्होंने जोर दिया कि यूरोपीय देश इस युद्ध के मुद्दे पर एक एकजुट मोर्चा बनाने में नाकाम रहे हैं। स्पेन और इटली जैसे देशों ने जहाँ इस युद्ध की स्पष्ट शब्दों में आलोचना की है, वहीं फ्रांस और जर्मनी जैसे अन्य देशों ने इसकी सीधी निंदा करने से परहेज़ किया है और साथ ही इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा दी है।
इस बीच बेल्जियम के नौकरशाहों ने मुख्य रूप से इस बात पर ज़ोर दिया है कि अमेरिका ने युद्ध से पहले उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया, लेकिन वे इस सैन्य अभियान की निंदा करने में असफल रहे हैं।
ट्रेड यूनियन नेता रहे श्री केनेस ने कहा कि ईयू अधिकारियों के विचार ज़्यादातर उन औद्योगिक संपर्कों और सैन्य लॉबियों से प्रभावित होते हैं जिन्हें संघर्ष से फ़ायदा होता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह सब पैसे का खेल है। यह कोई नयी बात नहीं है कि यूरोपीय नेता यूरोपीय लोगों के बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं। वे बस बड़े नेताओं की बात मानते हैं। यह लॉबियों, खासकर सैन्य लॉबी के बारे में भी है, जो असल में बहुत ज़्यादा ताक़तवर हैं।"उन्होंने कहा कि इस समूह के ज़्यादातर अधिकारी उद्योग जगत से आते हैं और आखिर में वहीं लौट जाते हैं, जिसका मतलब है कि वे सिर्फ़ उन लॉबियों की बात सुनते हैं... जिन्होंने उन्हें चुनाव जितवाया था। वे ऊँचे पदों पर रहते हुए अपना समय बिताते हैं। उन्होंने कहा कि न तो यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और न ही ईयू की उपाध्यक्ष एवं विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई थीं। इसलिए उन्हें अपने कामों के लिए जवाबदेह ठहराए जाने की बहुत कम ज़रूरत महसूस होती थी।
श्री केनेस ने माना कि कुछ अधिकारियों ने ईरान युद्ध के बारे में संदेह जताना शुरू कर दिया है। उन्होंने ऐसा सैन्य आक्रामकता के प्रति असली विरोध के बजाय तेल की बढ़ती कीमतों और जनता के घटते समर्थन के कारण हो रहा है। उन्होंने कहा , "आम यूरोपीय लोग युद्ध नहीं चाहते, क्योंकि सैन्य खर्च सामाजिक सेवाओं की कीमत पर किया जाता है, जो पहले से ही चार साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण प्रभावित हैं। हमारे पास आवास और चिकित्सा देखभाल के लिए प्रतीक्षा सूचियाँ हैं।"उन्होंने कहा, " वे बस यही कहते हैं कि अगर हम उनसे वहाँ जाने के लिए एक पैसा भी माँगें तो उनके पास पैसे नहीं होते। युद्धों के लिए उनके पास हमेशा पैसे होते हैं। यही मुख्य समस्या है।"हाल के जनमत सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए श्री केनेस ने कहा कि पूरे यूरोप में युद्ध को लेकर जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है, और इस समूह द्वारा किसी भी तरह की संभावित सैन्य भागीदारी का भारी विरोध हो रहा है।
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