तेहरान , मई 03 -- होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और कड़ा करने की योजना के तहत ईरानी सांसदों ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस योजना के अनुसार, इजरायली जहाजों के इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे से गुजरने पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा, जबकि अमेरिकी जहाजों को केवल तभी अनुमति दी जाएगी जब वे युद्ध के दौरान हुए सभी नुकसानों की भरपाई करेंगे।
ईरानी संसद के प्रथम उपाध्यक्ष अली निकजाद ने 12-सूत्रीय मसौदा योजना का विवरण देते हुए कहा कि यह नया नियम इजरायली जहाजों को 'किसी भी समय' जलडमरूमध्य से गुजरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा 'शत्रु देश' के रूप में वर्णित देशों के जहाजों को केवल तभी जाने की अनुमति दी जाएगी जब वे युद्ध क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान करेंगे।
उपाध्यक्ष ने हालांकि इजरायल के अलावा अन्य देशों के नाम नहीं लिया, लेकिन ईरानी अधिकारी अक्सर अमेरिका और उसके कुछ क्षेत्रीय सहयोगियों, विशेष रूप से खाड़ी देशों के लिए इसी तरह की भाषा का उपयोग करते रहे हैं।
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध को दो महीने बीत चुके हैं और यह समुद्री मार्ग, जो कुल वैश्विक तेल प्रवाह के लगभग 20 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है, फिलहाल बंद है। इसके कारण कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का पाँचवां हिस्सा रुका हुआ है। गैर-शत्रु देशों के लिए ईरान एक 'टोल आधारित प्रणाली' शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत जहाजों को जलडमरूमध्य में प्रवेश करने से पहले ईरान से अनुमति लेनी होगी।
श्री निकजाद के अनुसार, यह नीति अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप लागू की जाएगी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान जलडमरूमध्य की स्थिति को युद्ध-पूर्व व्यवस्थाओं में वापस नहीं ले जाएगा।
उपाध्यक्ष ने कहा, "हम होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने अधिकारों को नहीं छोड़ेंगे और जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी।" उन्होंने होर्मुज पर ईरान के प्रस्तावित नए नियंत्रण की तुलना 1951 में तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के ऐतिहासिक महत्व से की।
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