नयी दिल्ली , जनवरी 25 -- भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 39वें विशेष सत्र में शुक्रवार को पारित प्रस्ताव के विरोध में मतदान कर ईरान को 'सिद्धांतों पर आधारित और मजबूत समर्थन' देने के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है।
राजदूत फतहली ने शनिवार को 'एक्स' पर लिखा, ''मैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अन्यायपूर्ण और राजनीति से प्रेरित प्रस्ताव का विरोध करने और ईरान के प्रति भारत सरकार के अटल और सैद्धांतिक समर्थन के लिए दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। भारत का यह निर्णय इंसाफ, बहुपक्षवाद और राष्ट्र की संप्रभुता के प्रति उसकी निष्ठा को दर्शाता है।''भारत ने शुक्रवार को ईरान में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ ईरानी सरकार की कार्रवाई की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है। भारत उन सात देशों में शामिल था, जिन्होंने ईरान पर एक स्वतंत्र तथ्य-अन्वेषण अभियान के लाये प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। भारत के अलावा अन्य देश चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, इंडोनेशिया, वियतनाम और इराक हैं।
47 सदस्यीय परिषद में इस प्रस्ताव के पक्ष में 25, विपक्ष में सात वोट पड़े जबकि 14 देशों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे।
मानवाधिकार परिषद ने ईरान गणराज्य में 'बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति' पर अपनी 39वीं विशेष बैठक में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाई की निंदा की, जिसमें बच्चों सहित हजारों व्यक्तियों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों से जुड़े हजारों व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
इसमें ईरान सरकार से मानवाधिकारों के प्रति अपने कर्तव्यों का सम्मान करने और उन्हें पूरा करने का आग्रह किया गया है। साथ ही सरकार से उन सभी आवश्यक कदमों को उठाने की अपील की गयी है, जिनसे कानूनी प्रक्रिया के बिना की जाने वाली हत्याओं और जीवन छीनने के अन्य अवैध तरीकों पर रोक लग सके। इसके अलावा लोगों को संदेहास्पद तरीके से गायब करने, यौन व लिंग आधारित हिंसा, ठोस आधार के बिना गिरफ्तारी एवं कैद, संपर्क विहीन हिरासत और प्रताड़ना जैसी क्रूरताओं को रोका की बात कही गयी है। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किये जाने वाले अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार या दंड को समाप्त करने पर भी जोर दिया गया है।
परिषद ने ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर तथ्य अन्वेषण अभियान के लिए दो साल की मियाद और विशेष दूत के लिए एक साल की मियाद बढ़ाने का प्रस्ताव भी पारित किया।
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