तेहरान , अप्रैल 22 -- ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक 'चाल' है और उसने कभी इसके लिए दरख्वास्त नहीं की थी।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने 'धमकियों के साये' में युद्धविराम विस्तार या नयी बातचीत की कोई गुजारिश नहीं की है।

श्री अराघची ने ईरानी बंदरगाहों की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा करते हुए इसे 'युद्ध की कार्रवाई' और मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, "ईरान जानता है कि दबंगई का मुकाबला कैसे करना है। "ईरानी संसद के अध्यक्ष बगर गालिबाफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने युद्धविराम विस्तार को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नजरिये से इसका 'कोई मतलब नहीं' है और इसकी 'कोई वास्तविक अहमियत' नहीं है।

उन्होंने इस कदम को 'अचानक हमले' के लिए वक्त हासिल करने की रणनीति बताया और दलील दी कि जो पक्ष इस तरह के दबाव का सामना कर रहा हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामाबाद में किसी भी औपचारिक शांति वार्ता में शामिल होने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना ईरान की अनिवार्य शर्त है।इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर (एमएनए) ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की है। एजेंसी ने ताकत के दम पर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की धमकियों को फिर दोहराया।

युद्धविराम विस्तार की यह घोषणा युद्ध में हुए कई बड़े घटनाक्रमों के बाद हुई है। हमलों पर रोक के बावजूद श्री ट्रंप ने अमेरिकी सेना को नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया है, जो ईरान के लिए विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है।

श्री ट्रंप ने दावा किया कि यह विस्तार आंशिक रूप से ईरानी सरकार में 'गहरी दरार' होने के कारण किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस आख्यान को खारिज कर दिया है और स्थायी शांति के लिए खुद की '10-सूत्रीय योजना' पर कायम हैं।

मेहर समाचार एजेंसी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, जो पिछले कुछ दिनों से बार-बार दावा कर रहे थे कि वह ईरानके साथ युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे, उन्होंने एकतरफा रूप से युद्धविराम विस्तार की घोषणा कर दी।

एजेंसी के मुताबिक, ट्रंप को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि उन्होंने पहले खुले तौर पर जोर दिया था कि वह किसी भी हाल में युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे और ईरान को इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेना ही होगा।

श्री ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं और अगर ईरान सहमत नहीं हुआ तो युद्ध फिर से शुरू हो जायेगा।

ईरानी अधिकारियों ने हालांकि चुप्पी साधे रखी है और बातचीत में शामिल होने या न होने के संबंध में किसी आधिकारिक रुख की घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है।

एक अन्य अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम के विस्तार का अनुरोध नहीं किया था, और ट्रंप की घोषणा के कई मायने हो सकते हैं।

"पहला मतलब यह है कि ट्रंप युद्ध हार चुके हैं। उन्होंने युद्ध के दौरान सभी संभावित परिदृश्यों का परीक्षण और कार्यान्वयन कर लिया है।"इसमें कहा गया है कि श्री ट्रंप जानते हैं कि युद्ध के जरिये उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए वह युद्ध से बाहर निकलने को ही अपने लिए सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। अगर वह युद्ध जारी भी रखते हैं, तब भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा।

तस्नीम ने कहा कि हालांकि इस युद्ध में अमेरिका के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, लेकिन श्री ट्रंप हर मुमकिन हथकंडे से धोखा देने सहित कुछ भी कर सकते हैं, जिनमें युद्धविराम का विस्तार भी शामिल है।

इसमें कहा गया है कि श्री ट्रंप युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर सकते हैं, लेकिन फिर वही अमेरिकी प्रशासन या इजरायल 'आतंकवादी कदम' उठा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि ईरान ऐसे परिदृश्य को कम कर नहीं आंकता और इस तरह की संभावना पर करीब से नजर रख रहा है।

इसमें कहा गया है कि अमेरिका युद्ध से पीछे हट जायेगा और इजरायल लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन के बहाने इस जंग में बना रहेगा।

अमेरिकी अधिकारियों को हालांकि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अमेरिका एकतरफा रूप से युद्ध से भाग नहीं सकता और इजरायल को लड़ाई में बनाये नहीं रख सकता।

नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि शत्रुता जारी है। जब तक नौसैनिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक ईरान कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा और अगर जरूरी हुआ तो ताकत के बल पर इस नाकेबंदी को तोड़ देगा।

इसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है और ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति को अधर में रखना चाहता है।

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