तेहरान , जुलाई 22 -- ईरान ने बुधवार को अपने कुछ क्षेत्रीय पड़ोसी देशों पर विरोधियों का साथ देने का आरोप लगाया और कहा कि 'ईरान के दुश्मनों को पनाह देना और ईरानियों के खिलाफ संघर्ष भड़काने के लिए उनके साथ सांठगांठ करना' अतीत के प्रति 'नाशुक्रगुजारी और अदूरदर्शिता' को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में 1991 में इराकी सेना के पीछे हटने के बाद कुवैत के जलते सैकड़ों तेल कुओं को बुझाने में मदद करने की ईरान की भूमिका को याद किया। उन्होंने इशारा किया कि ईरान की इस सद्भावना का सम्मान नहीं किया गया।
खाड़ी युद्ध के बाद कुवैत में काम कर रहे ईरानी विशेषज्ञों की तस्वीर साझा करते हुए श्री बघाई ने इसे 'ईमानदार और समर्पित ईरानी विशेषज्ञों की ऐतिहासिक तस्वीर' बताया, जिन्होंने देश के जलते तेल कुओं को बुझाने में मदद की थी। उन्होंने याद दिलाया कि ईरान-इराक युद्ध समाप्त हुए महज तीन वर्ष बीते थे और उस दौरान कुवैत समेत जीसीसी देशों ने श्री सद्दाम हुसैन का साथ दिया था। इसके बावजूद जब कुवैत ने मदद मांगी तो ईरान ने उसकी गुहार का सकारात्मक जवाब दिया था।
श्री बघाई के अनुसार, ईरान ने तेल उद्योग के विशेषज्ञों की 47 सदस्यीय टीम भेजी थी, जिसने कुवैत के विशाल बुरगान तेल क्षेत्र में जलते 28 कुओं को बुझाने में मदद की। उन्होंने कहा कि यह अभियान 'इतिहास में तेल कुओं की आग बुझाने का सबसे बड़ा अभियान' बन गया।
अपने कुछ पड़ोसियों की आलोचना करने के लिए इस घटना का हवाला देते हुए श्री बघाई ने लिखा, "ईरान के स्वाभिमानी लोगों ने उस आग को बुझाया जो आपको खा रही थी, फिर भी आप हमारे लोगों के खिलाफ खड़ी बदनीयत ताकतों की आग का हिस्सा बन गये हैं।" उन्होंने कहा, 'ईरान हमेशा अच्छे पड़ोसी धर्म के प्रति प्रतिबद्ध रहा है', लेकिन चेतावनी देते हुए कहा कि 'नाशुक्रगुजारी और अदूरदर्शिता का धुआं नाशुक्रों की अपनी आंखों में ही जायेगा'।
उन्होंने इस कहावत के साथ अपनी बात समाप्त की, "जो कांटा बोयेगा, वह अंगूर नहीं काटेगा।"ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब ईरान-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के लगातार बढ़ने से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और ईरान कुछ खाड़ी देशों पर क्षेत्र में अपने विरोधियों की उपस्थिति और गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहा है।
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