पुणे , मार्च 05 -- ईरान-इजरायल संघर्ष से खाड़ी देशों को किये जाने वाले अंगूर निर्यात को गहरा झटका लगा है और इससे महाराष्ट्र में सांगली जिले के अंगूर उत्पादक और व्यापारी गहरे वित्तीय संकट में घिर गये हैं।

ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में प्रमुख समुद्री और हवाई व्यापार मार्गों के बाधित होने से निर्यात परिचालन लगभग ठप हो गया है। जहाजों के आवागमन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने और बीमा लागत में भारी बढ़ोतरी से करोड़ों रुपये का लेन-देन अधर में लटक गया है।

सांगली से प्रत्येक वर्ष हजारों टन अंगूर अमीरात, सऊदी अरब और कतर सहित कई खाड़ी देशों को निर्यात किये जाते हैं। इस सीजन में सांगली के कोल्ड स्टोरेज में लगभग 350 कंटेनर अंगूर बिना बिके पड़े हैं और नया माल रखने के लिए इन केंद्रों में जगह कम पड़ती जा रही है। इसके अलावा करीब 700 कंटेनर के बराबर अंगूर अब भी बागों में हैं, जो तुड़ाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि इन्हें जल्द ही नहीं भेजा गया, तो उपज के खराब होने का खतरा है, जिससे किसानों का नुकसान और बढ़ जायेगा।

मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (न्हावा शेवा) पर लगभग 300 कंटेनर फंसे हैं, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण शिपिंग शेड्यूल गड़बड़ा गया है। बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि ने व्यापारियों को नयी खेप रोकने के लिए मजबूर कर दिया है।

राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कराड उत्तर के विधायक डॉ अतुलबाबा भोसले ने अंगूर और किशमिश उत्पादकों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान के रास्ते बड़ी मात्रा में सस्ती चीनी किशमिश भारत में प्रवेश कर रही है। इससे सांगली और तासगांव में उत्पादित किशमिश का बाजार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आयात मार्गों की गहन जांच की मांग की और सीमा शुल्क विभाग से सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया।

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