तेहरान/तेल अवीव , मार्च 03 -- ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और जवाबी कार्रवाई के चौथे दिन, इजरायल ने लेबनान के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी। इजरायली फौजों ने लेबनान की सीमा पार की और लेबनानी फौजों को सीमा पर बनी कई चौकियों को खाली करके पीछे हटना पड़ा। इस बीच ईरान में बीते चार दिनों में मरने वालों लोगों की संख्या 787 पहुंच गयी है।

लेबनान के दक्षिणी इलाकों पर इजरायल के जोरदार हमले के बाद इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि सेनाओं को लेबनान में और कई रणनीतिक जगहों पर कब्जा करने की इजाजत दे दी गयी है। यह कदम उनके देश की सीमा पर रह रहे लोगों के लिए बहुत जरूरी है।

सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने ज़ोर देकर कहा कि यह कदम लेबनान में किसी बड़े ज़मीनी हमले की शुरुआत नहीं है। गौरतलब है कि लेबनान के दक्षिणी इलाकों से ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह का नियंत्रण है। वह अपनी गतिविधियां वहीं से चलाता है। हिजबुल्लाह की राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख महमूद कोमाती ने कहा कि उनके पास जंग में उतरने के अलावा कोई और उपाय नहीं है।

लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने कहा है कि सरकार का हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का फैसला 'अंतिम' है और इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। उसे अपने हथियार सौंपने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध और शांति से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार केवल सरकार के पास है।

इन हमलों में लेबनान में कम से 52 लोग मारे गए हैं और करीब डेढ़ सौ घायल हुए हैं। परोपकारी संस्था रेड क्रिसेंट ने कहा है कि अमेरिकी इजरायली बमबारी में कम से कम 787 ईरानी मारे जा चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए ने कहा कि है ईरान के नतान्ज़ में बने भूमिगत यूरेनियम संवर्धन स्थल के प्रवेश द्वार हाल ही में हुए अमेरिकी-इजरायली सैन्य हमलों में फिर से प्रभावित हुए। इन्हें पिछले वर्ष भी अमेरिकी बमबारी में नुकसान झेलना पड़ा था। यह भूमिगत ईंधन संवर्धन संयंत्र (एफईपी) ईरान में स्थित तीन यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं में से एक है। संस्थान ने कहा, "किसी भी प्रकार के विकिरण की उम्मीद नहीं है और एफईपी पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं देखा गया है।

इससे पहले, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मौजूद अमेरिका के दूतावास पर एक ड्रोन हमला हुआ। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, "शुरुआती अनुमान के मुताबिक, रियाद में अमेरिकी दूतावास को ड्रोन से निशाना बनाया गया है। इस घटना में मामूली ढंग से आग की लपटें देखी गयीं और इमारत को मामूली नुकसान हुआ।" रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब ने अब तक आठ ड्रोन मार गिराये हैं।

इन हमलों के बाद अमेरिकी दूतावास ने कहा कि उसने अपने मिशन पर ड्रोन हमले के बाद सेवाएं स्थगित कर दी हैं। अमेरिका को कुवैत का दूतावास भी बंद करने पर विवश होना पड़ा है। इसके अलावा उसने कई देशों में रह रहे अपने नागरिकों को फौरन देश छोड़ने की सलाह दी है। इनमें बहरीन, मिस्र, जार्डन, कुवैत आदि देश शामिल हैं। अमेरिका ने यह भी कहा है कि उसके जो नागरिक इजरायल में हैं और वापस आना चाहते हैं वे मिस्र के रास्ते का उपयोग करें।

ईरान ने अतिव्यस्त समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक अधिकारी ने कहा कि होर्मुज मार्ग को बंद कर दिया गया है और जो जहाज वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर हमला किया जाएगा। गार्ड के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी के हवाले से कहा गया, " होर्मुज बंद है। अगर कोई गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड और नौसेना उन जहाजों पर हमला कर देंगे।" गौरतलब है कि होर्मुज मार्ग लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है जो सऊदी अरब, ईरान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात सहित बड़े तेल तेल उत्पादकों को ओमान की खाड़ी और अरब सागर के रास्ते वैश्विक बाजार से जोड़ता है। दुनिया भर में होने वाली तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।

इस दौरान पश्चिमी एशिया की ऊर्जा इकाइयों पर संकट के बादल छाए रहे। ओमान की बंदरगाह दुकम में एक तेल भंडारण इकाई को मंगलवार को ड्रोन हमले के बाद नुकसान पहुंचा। वहीं, कतर एनर्जी ने ड्रोन हमलों के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का उत्पादन रोक दिया। यह कदम तब उठाया गया जब सऊदी अरब ने पुष्टि की कि उसने एक अलग ड्रोन हमले के बाद आग लगने के कारण रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी की कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास मध्यम और उच्च-मध्यम श्रेणी के हथियारों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा कि हथियारों के भंडारण के मामले में वह "इतने मजबूत पहले कभी नहीं रहे" इसलिए अगर यह युद्ध 'लंबे समय तक' भी लड़ा जा सकता है। उन्होंने सीएनएन को दिये एक अलग साक्षात्कार में कहा कि कार्रवाई "बहुत प्रभावी" है और अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग कर रहा है। श्री ट्रंप ने कहा कि अगला चरण शीघ्र आने वाला है। उन्होंने इसे "बड़ी लहर" करार देते हुए कहा, "हमने अभी तक उन्हें पूरी ताकत से नहीं मारा है। बड़ी कार्रवाई अभी बाकी है।"उन्होंने ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व खत्म हो चुका है और अब ईरान बातचीत करना चाहता है। ईरान की हवाई सुरक्षा, वायु सेना, नौसेना और नेतृत्व 'खत्म' हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, "लेकिन, मैंने कहा बहुत देर हो चुकी है।"अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक अलग बयान में यह भी कहा है कि ब्रिटेन और अमेरिका के संबंध 'साफ तौर पर अब वैसे नहीं रहे, जैसे पहले थे।' उनकी यह टिप्पणी तब आयी है, जब ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली हमले में शामिल नहीं होने का फैसला लिया।

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अभियान का मुख्य ध्यान ईरान की कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसकी नौसेना से उत्पन्न खतरे को समाप्त करना है।

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