तेहरान , मई 26 -- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अधिकारियों को देश में इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश दिया है।

इससे ईरान में लागू इंटरनेट ब्लैकआउट समाप्त हो जायेगा। ईरान में इंटरनेट सेवाओं को बंद हुये 88 दिन हो चुके हैं। यह किसी भी देश द्वारा लगाया गया अब तक का सबसे लंबा इंटरनेट ब्लैकआउट है।

हालांकि, आदेश की घोषणा के बाद भी ईरान के भीतर इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या वास्तव में बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के इंटरनेट सेवा पूरी तरह वापस आ पायेगी। यह स्थिति इस बात को लेकर इस्लामिक गणराज्य के भीतर गहरे मतभेदों को रेखांकित करती है कि आम ईरानियों को सूचनाओं तक कितनी पहुंच दी जानी चाहिये।

ईरान की इंटरनेट प्रणाली अत्यधिक केंद्रीकृत है, और इसे शक्तिशाली सरकारी निकायों के एक ताने-बाने के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, जिसकी देखरेख 'सुप्रीम काउंसिल फॉर साइबरस्पेस' नाम की संस्था करती है। इस निकाय का गठन 2012 में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने किया था।

इस परिषद में ईरान के सुरक्षा, धार्मिक और न्यायिक प्रतिष्ठानों की वरिष्ठ हस्तियां शामिल हैं, जिनमें खुफिया मंत्री, मुख्य न्यायाधीश और वे धर्मगुरु भी हैं जो लंबे समय से ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़े नियंत्रण की वकालत करते रहे हैं।

प्रणाली के भीतर कुछ रूढ़िवादी हस्तियों ने इंस्टाग्राम जैसे ऑनलाइन मंचों की तुलना अमेरिकी लड़ाकू विमानों से की है। उनका तर्क है कि बिना किसी रोक-टोक के इंटरनेट की पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक खतरा है और यह पश्चिमी प्रभाव का एक हथियार है।

इस गतिरोध को दूर करने के लिए, ईरान के मध्यमार्गी सुधारवादी राष्ट्रपति ने इस महीने एक समानांतर कार्य बल का गठन किया, लेकिन उन्हें सर्वोच्च नेता की परिषद के फैसले को पलटने के प्रयास के आरोपों का सामना करना पड़ा। हालांकि इंटरनेट सेवा बहाल करने के उनके आदेश की खबर कल रात सामने आई थी, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि इस निर्देश को पूरी तरह से लागू किया जाएगा या नहीं, और व्यावहारिक रूप से इसका क्या परिणाम होगा।

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