नोएडा , अक्टूबर 07 -- उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा स्थित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ ईपीएफओ की नई पहलों और योजनाओं को लेकर बुधवार को जागरूकता एवं संवाद बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, कर्मचारियों के नामांकन तथा ईपीएफओ की ओर से किए जा रहे विभिन्न सुधारों और पहलों की जानकारी दी गई।

बैठक को संबोधित करते हुए ग्रेटर नोएडा क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त द्वितीय विजय कुमार ने उद्योग प्रतिनिधियों को संगठन की प्रमुख पहलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से ईपीएफ वेतन सीमा में किए गए बदलाव पर चर्चा की। बैठक में बताया गया कि ईपीएफ के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है, जो 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है। उन्होंने नियोक्ताओं से पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल करने और ईपीएफओ की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने का आग्रह किया।

इस दौरान प्रवर्तन अधिकारी श्री दिनेश कुमार मिश्रा ने विभिन्न योजनाओं और अभियानों पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 (ई ई सी-2026), विश्वास योजना तथा ईपीएफ वेतन सीमा में वृद्धि से जुड़े प्रावधानों की जानकारी उद्योग प्रतिनिधियों के साथ साझा की। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नियोक्ताओं को पात्र कर्मचारियों के पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा कवरेज सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया।

बैठक में आईआईए ग्रेटर नोएडा के चेयरमैन सरबजीत सिंह, राकेश बंसल सहित आईआईए के अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। ईपीएफओ की ओर से श्री अजय प्रताप सिंह तथा श्री दिनेश कुमार मिश्रा, प्रवर्तन अधिकारी भी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने ईपीएफओ से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव, समस्याएं और जिज्ञासाएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। अधिकारियों ने संबंधित विषयों पर जानकारी देते हुए सवालों का समाधान किया और आवश्यक प्रक्रियाओं के बारे में भी अवगत कराया।

अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ उपलब्ध कराने में नियोक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं उद्योग प्रतिनिधियों ने ईपीएफओ के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक के अंत में उद्योग जगत और ईपीएफओ के बीच निरंतर संवाद, समन्वय और सहयोग को मजबूत बनाए रखने पर बल दिया गया।

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