बड़वानी , सितंबर 12 -- मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में 13.99 करोड़ रुपये के नाबार्ड रिण के कथित दुरुपयोग और धनराशि को दूसरी जगह डायवर्ट किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय की टीमों ने सेंधवा क्षेत्र में मेसर्स निमाड़ एग्रो पार्क, उसके साझेदारों और उससे जुड़ी संस्थाओं के चार परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।

ईडी द्वारा कार्रवाई के बाद जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई। निमाड़ एग्रो पार्क के साथ-साथ इससे जुड़े बी.एस. कॉटन प्राइवेट लिमिटेड, श्री राजराजेश्वर डेवलपर्स और श्री राजराजेश्वर वेंचर्स कार्रवाई के दायरे में आए।

यह कार्रवाई नाबार्ड द्वारा स्वीकृत 13.99 करोड़ रुपये के टर्म लोन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत की गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि रिण की राशि का इस्तेमाल जिस परियोजना के लिए किया जाना था, क्या उसका इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया और इस धनराशि की आगे किस तरह आवाजाही हुई।

मामला बड़वानी जिले की सेंधवा तहसील के जामली गांव में प्रस्तावित एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर परियोजना से जुड़ा है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 31.04 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय से 10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और नाबार्ड से 13.99 करोड़ रुपये का टर्म लोन शामिल था।

जांच एजेंसी के मुताबिक परियोजना के लिए स्वीकृत धनराशि का कथित तौर पर निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं किया गया और उसका एक हिस्सा अन्यत्र डायवर्ट किए जाने के संकेत मिले हैं। इसके चलते प्रस्तावित परियोजना पूरी नहीं हो सकी। बाद में 29 सितंबर 2024 को संबंधित लोन खाते को एन पी ए घोषित कर दिया गया।

इस मामले में जांच की शुरुआत सीबीआई की कोलकाता स्थित आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी है। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार सहित विभिन्न आरोपों की जांच की जा रही है। इसी आधार पर ईडी ने कथित धन शोधन से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की है।

तलाशी के दौरान ईडी की टीमों ने कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन और परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। जांच एजेंसी ने संबंधित व्यक्तियों के चार बैंक लॉकर भी फ्रीज किए हैं। इन लॉकरों में मौजूद संपत्ति और दस्तावेजों की जांच आगे की कार्रवाई के लिए की जाएगी।

ईडी अब कथित मनी ट्रेल की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नाबार्ड से प्राप्त रिण की राशि किन खातों में गई, उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया और धनराशि के लेनदेन में किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका रही। जांच में परियोजना से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

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