नयी दिल्ली , मई 27 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली की एक विशेष पीएमएलए अदालत में तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन, जवाद अहमद सिद्दीकी, विनोद कुमार और श्रीओम चौहान के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

ईडी ने जांच के दौरान इन आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया गया था। नयी दिल्ली के मदनपुर खादर गांव में स्थित खसरा नंबर 792 की भूमि को जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी से हासिल करने के संबंध में दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। ईडी ने इसी के आधार पर जांच शुरू की थी।

ईडी की जांच में सामने आया कि जिन सामान्य पॉवर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के आधार पर जमीन तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को हस्तांतरित की गयी थीं, वे 7 जनवरी 2004 की थीं। हालांकि, जांच में पाया गया कि कई मूल भूमि स्वामियों की मृत्यु 2004 से दशकों पहले ही हो चुकी थी। जांच में आगे खुलासा हुआ कि आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य ने जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए मूल भूमि स्वामियों के जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान बनाने की साजिश रची थी। ईडी ने यह भी पाया कि जीपीए वास्तव में 2012-13 के दौरान जाली बनाई गई थीं, जो मेसर्स तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को संपत्ति हस्तांतरित करने से ठीक पहले का समय था।

ईडी के अनुसार जवाद अहमद सिद्दीकी ने अन्य आरोपियों की मिलीभगत से भूमि हड़पने की इस कार्रवाई को एक वास्तविक लेन-देन के रूप में दिखाने के लिए बैंकिंग लेन-देन का एक झूठा दिखावा तैयार किया था। जांच में आगे यह भी पता चला कि अवैध रूप से जमीन हड़पने के लिए जवाद अहमद सिद्दीकी ने भारी मात्रा में नकद लेन-देन किया था। इस मामले में शामिल अपराध की कमाई लगभग 47.76 करोड़ रुपये आंकी गई है।ईडी ने उक्त भूमि को कुर्क कर लिया है, जिसकी कीमत 45.84 करोड़ रुपये है। इस जमीन पर कथित तौर पर जवाद अहमद सिद्दीकी और मेसर्स तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन ने अवैध कब्जा किया था। मामले की आगे की जांच जारी है।

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