नयी दिल्ली , फरवरी 06 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग मुआवजा घोटाले के सिलसिले में कई जगहों पर तलाशी अभियान चला रहा है।
यह मामला भूमि अधिग्रहण मुआवजे के मूल्यांकन, सर्टिफिकेशन और वितरण में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों से जुड़ा है, जिसमें सरकारी कर्मचारी और निजी लाभार्थी शामिल हैं। आरोप है कि इन गड़बड़ियों से अपराध की कमाई हुई और उसका अवैध तरीके से धन शोधन किया गया।
यह परियोजना 157.70 किलोमीटर के हिस्से को कवर करती है और इसे प्रशासनिक रूप से तीन सेक्टरों में बांटा गया था, जिसमें याचुली (0.00-43.635 किमी), जिरो (43.635-63.700 किमी) और रागा (63.700-149.440 किमी) शामिल हैं।
जांच के दौरान पाया गया कि जिरो के तत्कालीन उपायुक्त ने शुरू में पूरे पोटिन-बोपी हिस्से के लिए 289.40 करोड़ रुपये का मुआवजा अनुमान तैयार किया था। हालांकि, राज्य-स्तरीय बैठक के दौरान मुआवजा पैकेज को रोक दिया गया और फिर उसे 198.56 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया।
इसके बावजूद वितरण प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर बड़ी मात्रा में राशि को बचत खातों में हस्तांतरित किया गया, और कई चेक फर्जी लाभार्थियों को जारी किये गये, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जांच से पता चला है कि अधिकारियों ने जानबूझकर ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग (पोटिन-बोपी) परियोजना के याज़ाली सेक्टर में संरचनाओं के बढ़ा-चढ़ाकर और फर्जी मूल्यांकन तैयार करके और प्रमाणित किया तथा अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने गैर-मौजूद संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों को इसमें शामिल करने में मदद की।
मौजूदा जांच के हिस्से के रूप में, छह आवासीय परिसरों में तलाशी ली जा रही है, जिसमें तत्कालीन उपायुक्त, भूमि अभिलेख एवं सर्वेक्षण निदेशालय (डीएलआरएसओ), मूल्यांकन अधिकारियों और प्रमुख निजी लाभार्थियों तथा बिचौलियों के परिसर शामिल हैं। इसका उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल सबूत हासिल करना और अपराध की कमाई से हासिल की गयी चल और अचल संपत्तियों की पहचान करना है।
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