नयी दिल्ली , मई 09 -- श्रावंती समूह के प्रवर्तक दंडमुडी वेंकटेश्वर राव और उनके सहयोगियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) की धन शोधन जांच में लगभग 284 करोड़ रुपये के बड़े पैमाने पर किये गये धन शोधन का खुलासा हुआ है।
ईडी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि राव ने बैंकों भुगतान करने में भी चूक की थी। राव और उनके परिवार के सदस्यों तथा सहयोगियों के खिलाफ अपनी जारी जांच में जांच को प्रभावित करने के प्रयासों के सबूत भी पाये हैं।
ईडी ने धन शोधन जांच में लगभग 284 करोड़ रुपये के धन शोधन का खुलासा करते हुये श्रावंती समूह के दो निदेशकों डी.वी. राव और सुश्री डी. शांति किरण - के साथ डी.वी. राव के भाई डी. अवनेंद्र कुमार को हिरासत में ले लिया है। विशेष न्यायालय ने इन तीनों को 12 मई, 2026 तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेजा है।
डी.वी. राव और उनके सहयोगियों के खिलाफ इस जांच की शुरुआत गुरुग्राम के सेक्टर-40 थाने में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 0360/2025 के आधार पर हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि श्री डी.वी. राव के नियंत्रण वाली मेसर्स डी.जे.डब्ल्यू. इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने विभिन्न संस्थाओं से धोखाधड़ी कर ऋण प्राप्त किया था। प्रवर्तन निदेशालय की अब तक की जांच से पता चला है कि धोखाधड़ी के इस मामले में शामिल ऋण की कुल राशि लगभग 58 करोड़ रुपये थी।
डी.जे.डब्ल्यू. के लेखा अभिलेखों में यह दिखाया गया था कि मूल ऋणदाताओं को ऋण वापस किया जा रहा है, जबकि निदेशालय की जांच में खुलासा हुआ कि बैंकिंग आर.टी.जी.एस. प्रणाली का दुरुपयोग किया गया था। आर.टी.जी.एस. प्रपत्रों में धोखाधड़ी से वास्तविक ऋणदाताओं के नाम लिखे गये थे, लेकिन बैंक विवरण कोलकाता स्थित मुखौटा कंपनियों के दिये गये थे। परिणामस्वरूप, ऋण पुनर्भुगतान की धनराशि वैध ऋणदाताओं के पास जाने के बजाय नेक्सस इंटरनेशनल, भवतारिणी सेल्स प्राइवेट लिमिटेड और गाबेल ट्रेडिंग कंपनी जैसी मुखौटा कंपनियों में भेज दी गई थी।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पी.एम.एल.ए.), 2002 के तहत आगे की जांच के कारण एक और मामला (प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 336/2025) दर्ज किया गया और स्रवंती एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एस.ई.पी.एल.) से जुड़ी एक समानांतर धन शोधन जांच शुरू की गई। यह संस्थान भी श्री डी.वी. राव के ही नियंत्रण में था।
यह पता चला है कि एस.ई.पी.एल. द्वारा मेसर्स वर्सेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड नामक एक मुखौटा संस्था को "परामर्श शुल्क" के रूप में लगभग 75 लाख रुपये प्रति माह का धोखाधड़ी से भुगतान किया जा रहा था। इस संस्था का न तो कोई कार्यालय था और न ही कोई कर्मचारी, और यह राव के ससुर के नाम पर पंजीकृत थी। इस फर्जी व्यवस्था के माध्यम से 89.36 करोड़ रुपये अवैध रूप से डाइवर्ट किये गये थे।इसके साथ ही, एस.ई.पी.एल. ने माल या सेवाओं की किसी भी आपूर्ति के बिना 100 से अधिक मुखौटा संस्थाओं से फर्जी बिलों के माध्यम से 139 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी खरीदारी दिखाई। आरोप है कि इन भुगतानों को श्री डी.वी. राव और उनके परिवार ने नकद के रूप में वापस प्राप्त कर लिया। एस.ई.पी.एल. मामले में श्री डी.वी. राव और उनके परिवार के विरुद्ध चिन्हित की गई अपराध की कुल कमाई लगभग 228 करोड़ रुपये बतायी जा रही है।
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