नयी दिल्ली , जून 03 -- इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन की शीर्ष संस्था ईईपीसी इंडिया ने सरकार से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए एक अलग रेटिंग प्रणाली विकसित करने की मांग की है, जो उनके आकार और संचालन की प्रकृति के अनुरूप हो।

एमएसएमई मंत्रालय को लिखे एक पत्र में ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने बताया कि अपने क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों की तुलना किये जाने के कारण किस प्रकार एमएसएमई को बाहरी रेटिंग एजेंसियों से "इन्वेस्टमेंट ग्रेड" या उससे ऊंची रेटिंग प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इससे उन्हें वित्तीय संसाधनों तक पहुंच बनाने में कठिनाई होती है।

उन्होंने कहा, "एमएसएमई के लिए "सब-इन्वेस्टमेंट ग्रेड" रेटिंग होने के कारण बैंकों से ऋण प्राप्त करना काफी कठिन हो जाता है, क्योंकि उन्हें "इन्वेस्टमेंट ग्रेड" रेटिंग वाले उद्यमों की तुलना में कहीं अधिक रेहन देना पड़ता है। यह उनके व्यवसाय में आने वाली प्रमुख बाधाओं में से एक है।"ईईपीसी इंडिया ने बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि विभिन्न रेटिंग एजेंसियों के साथ हुई चर्चाओं से पता चला है कि अलग रेटिंग प्रक्रिया न होने के कारण विभिन्न उद्योगों के एमएसएमई की तुलना उनके क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों से की जाती है।

उदाहरण के लिए इस्पात क्षेत्र में किसी एमएसएमई की तुलना जेएसडब्ल्यू स्टील या टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनियों से की जाती है, जो उनके लिए एक अत्यंत अनुचित तुलना है। उचित रेटिंग प्रणाली के अभाव में एमएसएमई लगातार निम्न या "सब-इन्वेस्टमेंट ग्रेड" श्रेणियों में रखे जाते हैं।

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