पटना , जून 27 -- राज्य सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग मत्स्य पालक किसानों को आधुनिक तकनीक आधारित मछली पालन के गुर सिखाने के लिए भ्रमण दर्शन कार्यक्रम चला रहा है। कार्यक्रम के तहत इस वर्ष तीन हजार किसानों को राज्य के अंदर विकसित आधुनिक मछली पालन प्रक्षेत्र दिखाए जाएंगे। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 46 लाख 50 हजार रुपये की स्वीकृति दी है। माना जा रहा है कि इससे मछली पालन का तेजी से विकास होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इस योजना के तहत विभिन्न जिलों में विकसित चौर विकास एवं समेकित मत्स्य पालन, केज में मछली पालन, विकसित मत्स्य बीज हैचरी प्रक्षेत्र, फिश फीड मिल, बायोफ्लॉक एवं आरएएस तकनीक आदि विकसित मत्स्य प्रक्षेत्रों का भ्रमण दर्शन कराया जाएगा। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य है कि किसान अपने जिलों में अनुकरण कर नवीनतम तकनीक से मत्स्य पालन कर सकें। इससे न केवल मत्स्य उत्पादन में वृद्धि हो सकेगी बल्कि इससे जुड़े किसानों की वार्षिक आय में भी बढ़ोतरी होगी।
भ्रमण दर्शन की योजना राज्य के सभी जिलों में कार्यान्वित की जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत राज्य के तीन हजार मत्स्य किसानों को 150 बैचों, यानी 20 मत्स्य कृषक प्रति बैच में मत्स्य प्रक्षेत्रों आदि का एक दिवसीय भ्रमण दर्शन कराया जाएगा। मत्स्य कृषक राज्य के अंदर भ्रमण दर्शन कार्यक्रम के लिए निबंधन शुल्क के रूप में 100 रुपये प्रति कृषक की दर से अपने जिले के जिला मत्स्य कार्यालय में जमा करेंगे।
योजना के तहत लाभुकों के चयन के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है। योजना का लाभ इच्छुक किसान जो मछली पालन शुरू करना चाहते हों या जो पहले से निजी या पट्टे पर मछली पालन कर रहे हों ले सकते हैं। वहीं, इससे पहले योजना का लाभ ले चुके मछली पालकों को दोबारा इसका लाभ नहीं मिलेगा। इस भ्रमण दर्शन कार्यक्रम के लिए लाभुकों के चयन के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया गया है।
मछली उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए राज्य में अब तक 68,890 मछली पालकों को राज्य के भीतर एवं बाहर स्थित मत्स्य संस्थानों में निःशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 51,305 मछली पालकों को राज्य के भीतर तथा 17,585 मछली पालकों को राज्य के बाहर के संस्थानों में प्रशिक्षित किया गया है। वहीं, भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम के तहत अब तक 47,279 से अधिक मछली पालकों को राज्य में विकसित आर्द्रभूमि एवं बायोफ्लॉक इकाइयों की निर्माण प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए निःशुल्क भ्रमण कराया गया है।
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