श्रीनगर , सितंबर 01 -- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मेडिकल कॉलेजों में 12 से 48 घंटे की कठिन ड्यूटी और भारी काम के बावजूद बेहद कम स्टाइपेंड मिलने के विरोध में सड़कों पर उतर आये एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न का समर्थन किया है।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मांग है कि उनके मौजूदा 12,300 रुपये के मासिक इंटर्नशिप को बढ़ाकर तुरंत 30,000 रुपये किया जाये।

सुश्री मुफ्ती मंगलवार को सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) श्रीनगर में प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचीं और उनके आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि काम का भारी बोझ उठाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न को देश में मिलने वाले सबसे कम स्टाइपेंड में से एक है। उन्होंने कहा, "इंटर्न को 12 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है और पूरे जम्मू-कश्मीर में उन्हें बुनियादी छुट्टियों और पर्याप्त अवकाश से भी अक्सर वंचित रखा जाता है।"उन्होंने 30,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड की मांग को तर्कसंगत और जायज बताते हुए कहा कि कई राज्य पहले ही इंटर्नशिप स्टाइपेंड में अच्छी-खासी बढ़ोतरी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल लगभग 45,000 रुपये प्रदान करते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश ने अपने स्टाइपेंड को 12,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। बिहार ने भी अपने स्टाइपेंड में संशोधन किया है।

सुश्री मुफ्ती ने कहा कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब फिजूलखर्च वाले सरकारी कार्यक्रमों और गतिविधियों पर सार्वजनिक संसाधनों का बड़ा हिस्सा खर्च किया जा रहा है, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को संभाले रखने के लिए दिन-रात काम कर रहे युवा डॉक्टरों की मामूली और उचित बढ़ोतरी को खारिज करना समझ से परे है।" उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार से प्रदर्शनकारी इंटर्न के साथ तुरंत सार्थक बातचीत शुरू करने, उनकी चिंताओं का समाधान करने और बिना किसी देरी के उनके स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इंटर्न को उनकी कठिन सेवाओं के अनुरूप काम की उचित परिस्थितियां, पर्याप्त छुट्टियां और बुनियादी सुरक्षा प्रदान की जाये।

जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इतू ने कहा कि सरकार ने मेडिकल इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है।

इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखकर इंटर्न की मांग पर 'सहानुभूतिपूर्वक और तत्काल ध्यान' देने का अनुरोध किया।

श्री कर्रा ने कहा कि मेडिकल इंटर्न स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक 'महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा' हैं और वे नियमित रूप से 36 घंटे की शिफ्ट सहित लंबे और कठिन समय तक काम करते हैं।

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखकर एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न के मासिक स्टाइपेंड में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की लंबे समय से लंबित मांग में तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक देरी जारी रहने से स्थिति और बिगड़ सकती है तथा पूरे केंद्र शासित प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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