जिनेवा , जून 14 -- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में बुंडिबुग्यो वायरस के कारण फैली इबोला बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अभी तक इस जानलेवा वायरस से 138 लोगों की जान जा चुकी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों में अब तक इस बीमारी से संक्रमित 695 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 138 लोगों की मौत हो चुकी है।

कांगो में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ संक्रमितों की संख्या बढ़कर 676 हो गई है और 136 लोगों की जान जा चुकी है। यहाँ मृत्यु दर 20.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। कांगो के इतुरी प्रांत में इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। राहत और बचाव कार्य में जुटे कम से कम 16 स्वास्थ्य कर्मी भी इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। कांगो में सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं और आबादी का लगातार पलायन इस बीमारी को नियंत्रित करने में बड़ी बाधा बन रहा है।

पड़ोसी देश युगांडा में अब तक इबोला के 19 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें से दो मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा एक संभावित मरीज की भी जान गई है। युगांडा में राहत की बात यह है कि पिछले छह दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यहाँ के सभी मामले कांगो से आये संक्रमितों या उनके संपर्क में आये लोगों से जुड़े हैं और अभी तक स्थानीय स्तर पर आम जनता में इसके फैलने के संकेत नहीं मिले हैं।

बुंडिबुग्यो वायरस से होने वाली यह बीमारी इबोला का ही एक बेहद गंभीर रूप है। यह पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारी है, जिसके फैलने की शुरुआत चमगादड़ों या संक्रमित वन्यजीवों के संपर्क में आने से होती है। इसके बाद यह इंसानों के बीच खून या लार आदि के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। अभी तक इस वायरस के इलाज के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है।

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